Kaithal News: बम-बम भोले के जयकारों संग किया जलाभिषेक, सुबह 4 बजे से मंदिरों में लग गई लाइन

Prachin Gyarah Rudri Shiva Temple

नरेन्द्र सहारण, कैथल। Kaithal News: श्रावण मास के पहले सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। शहर के महाभारतकालीन प्राचीन ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, अंबकेश्वर मंदिर, हनुमान वाटिका, शिव वाटिका, अम्बकेश्वर मंदिर, गीता भवन मंदिर, शिव मंदिर छज्जु कुंड, शिव शक्ति धाम मंदिर, सेक्टर 19 व 20 के मंदिर व अन्य शिवालयों में भोले बाबा की पूजा अर्चना की व बमबम भोले के जयकारा लगाया। कैथल शहर में चूंकि शिवालयों की अधिकता है, जिसके चलते इसे मिनी काशी भी कहा जाता है। ऐसे में जिले के लोगों के लिए सावन मास का उत्साह और भी बढ़ जाता है। इस दौरान सुबह 4 बजे से मंदिरों में लाइन लग गई।

सुख समृद्धि की कामना की

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के ग्याहरा रुद्रों पर गंगा जल, दूध, शहद, चंदन, फल, फूल और भेल पत्र चढ़ाकर पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की। सुबह से सभी शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रावण माह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। इस कारण श्रद्धालुओं द्वारा पूरी श्रद्धा और उत्साह से पूरा माह भोले बाबा की पूजा अर्चना की जाती है। इस बार श्रावण के महीने में पांच सोमवार है। इन दिनों में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और व्रत रखने से भोले बाबा खुश होते है और श्रद्धालुओं को मनवांछित फल देते हैं।

प्राचीन ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

पुजारी मुनिंदर मिश्रा ने कहा कि हिंदू ग्रंथों में सावन माह में भगवान शिव की पूजा अर्चना और अराधना करने को बहुत ही शुभ और फलदायक माना गया है। उन्होंने बताया कि श्रावण माह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है। इस कारण श्रद्धालुओं द्वारा भोले बाबा की आस्था और विश्वास के साथ पूजा अर्चना की जाती है। उन्होंने कहा कि महाभारतकालीन प्राचीन ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों में ऐसा माना गया है कि महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों से कैथल के इस मंदिर में भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों की स्थापना करवाई थी, इसलिए कैथल को छोटी काशी भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि भोले बाबा की श्रावण माह में पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं।

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यहां लगते हैं मेले

जिले में श्री ग्यारह रुद्री मंदिर कैथल, श्री अंबकेश्वर मंदिर चंदाना गेट, बेचिराग गांव खड़ालवा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में सावन मास में मेले लगते हैं। शहर में श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में जलाभिषेक का अपना महत्व है। सुबह चार बजे से ही मंदिरों में रुद्राभिषेक शुरू हो जाता है।

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भोलेनाथ की महिमा का गुणगान किया

उधर, राजौंद में श्रावण मास के पहले सोमवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु मंदिरों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए पहुंचने शुरू हो गए थे। जिन्होंने भगवान शिव को जल चढ़ाकर घर की सुख शांति की कामना की। श्रद्धालुओं ने सावन माह के पहले सोमवार को भगवान शिव के मंदिर में भोलेनाथ की महिमा का गुणगान किया।

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सोमवार का व्रत रखने का मिलता है अधिक फल

आचार्य संजय शर्मा ने बताया कि श्रावण मास में शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन माह में सोमवार के व्रत रखने का अधिक फल मिलता है। सावन के महीने में भगवान भोले नाथ सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि जो भक्त सावन के सोमवार के व्रत रखते हैं, भोले नाथ उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को शिव की महिमा के बारे में जानकारी दी गई।

 

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