Pahalgam Terrorist Attack : सीसीएस बैठक में पाकिस्तान को सख्त संदेश, सिंधु जल समझौता भी रोका गया; कई और कदम उठाए

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पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की।

नई दिल्ली, बीएनएम न्‍यूज : Pahalgam Terrorist Attack : हाल ही में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर आतंकियों के कायराना हमले ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव की नई परतें जोड़ दी हैं। इस घटना के बाद हुई उच्चस्तरीय बैठक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने पांच महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिन्हें सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में पाकिस्तान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

सिंधु जल समझौते का निलंबन

 

सीसीएस की बैठक में लिए गए पहले निर्णय के तहत, भारत ने 1960 में किए गए सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का ऐलान किया। यह जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों के जल बंटवारे का प्रबंधन करता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कदम नहीं उठाएगा, तब तक यह समझौता प्रभावी नहीं रहेगा। इस निर्णय की महत्वता को समझते हुए, यह कहा जा सकता है कि भारत ने पूर्व में भी युद्ध की स्थिति में इस समझौते को नहीं रद किया था, जिससे इस पल का महत्व और भी बढ़ जाता है। इससे पाकिस्तान की नदी जल प्रबंधन व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जो पहले ही आर्थिक संकटों से जूझ रहा है।

अटारी चेक पोस्ट का निलंबन

 

सीसीएस के दूसरे निर्णय के तहत, अटारी चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है। अब पाकिस्तानी नागरिकों को, जो अटारी सीमा से भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें एक मई, 2025 तक लौटने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय सीमापार स्थिति को और अधिक कठिन बना देगा और पाकिस्तान के नागरिकों की यात्रा पर कड़ा अंकुश लगाएगा।

सार्क वीजा एक्जेंप्शन स्कीम का समापन

 

तीसरा महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि भारत ने पाकिस्तान के नागरिकों के लिए सार्क वीजा एक्जेंप्शन स्कीम (एसवीईएस) की छूट समाप्त कर दी है। यह योजना 1992 से प्रभावी थी, जिसके तहत पाकिस्तान के विशिष्ट नागरिकों को विशेष अनुमति दी जाती थी। अब, यदि कोई नागरिक उक्त योजना के तहत भारत में है, तो उसे 48 घंटों के भीतर लौटने का आदेश दिया जाएगा।

अपात्र घोषित किया गया पाक उच्चायोग का स्टाफ

 

सीसीएस का चौथा निर्णय यह रहा कि भारत ने पाक उच्चायोग में तैनात सैन्य, नौसेना और वायु सेना सलाहकारों को ‘पर्सन नान ग्राटा’ घोषित कर दिया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने दूतावास से भी इन अधिकारियों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या को भी घटाकर 55 से 30 कर दिया गया है, जिससे भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक स्तर को और कम किया है।

सैन्य बलों को सतर्कता के आदेश

 

सीसीएस की बैठक लगभग ढाई घंटे तक चली और इस दौरान सभी सैन्य बलों को उच्चस्तरीय सतर्कता बरतने का आदेश दिया गया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि सभी संबंधित बलों को इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस हमले के दोषियों को दंडित किया जाएगा और उनके आकाओं को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

वैश्विक समर्थन और कूटनीतिक स्थिति

 

सीसीएस की बैठक में भारत को इस घटना के प्रति वैश्विक समर्थन मिलने की भी बात कही गई। विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि कई देशों ने इस घटना की निंदा की है और यह दर्शाता है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने में भारत को समर्थन मिलेगा। यह कदम भारत की ज़ीरो टोलरेंस नीति को मजबूती देगा।

उच्च स्तरीय बैठक का महत्व

 

प्रमुख अधिकारियों की इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल जैसे शीर्ष नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सऊदी अरब दौरे से लौटते ही इस बैठक में भाग लिया और सभी संबंधित मुद्दों पर गहन चर्चा की।

रणनीतिक सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा

 

बैठक में चर्चा की गई कि जम्मू और कश्मीर में हाल ही में हुए सफल चुनाव और वहां हो रहे विकास कार्यों को रोकने के लिए आतंकी हमले का अंजाम दिया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीन सेना प्रमुखों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की और अपनी जानकारी साझा की। एनएसए अजीत डोभाल ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क के बारे में जानकारी प्रदान की, जो इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान अपनी मिट्टी का उपयोग आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिए कर रहा है।

आतंकवाद को सहन नहीं करेगा देश

 

भारत ने पहलगाम हमले के बाद जो कार्रवाई की है, उससे स्पष्ट है कि अब देश सीमा पार आतंकवाद को सहन नहीं करेगा। यह न केवल पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति और आंतरिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए भी एक आवश्यक कदम है। समझौतों की रोकथाम के साथ-साथ कड़े कदम और सतर्कता के निर्देश, भारत की दृढ़ता को दर्शाते हैं कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस समय, यह न केवल भारतीय सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि यह वैश्विक समुदाय की भी जिम्मेदारी है कि आतंकवाद के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएं।

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