Haryana Election 2024: हरियाणा में जानें भाजपा और कांग्रेस का रहेगा किस प्रकार की सोशल इंजीनियरिंग पर जोर

Nayab Singh Saini Bhupendra Singh Hooda

नरेन्द्र सहारण: Haryana Election 2024: हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और टिकटों के आवंटन में जातिगत समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है। भाजपा, जो तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए विभिन्न जातियों को टिकट दिए हैं। राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 22 सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसमें अहीर समाज के सात, गुर्जर समाज के छह, और मुस्लिम व सैनी समाज के दो-दो उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, खाती, बैरागी, कांबोज, कश्यप और कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों को भी एक-एक टिकट दिया गया है।

भाजपा का गैर जाटों पर जोर

भाजपा ने जाट समुदाय को 16 सीटों पर टिकट दिए हैं और ब्राह्मणों तथा पंजाबियों को समान रूप से 11-11 टिकट प्रदान किए हैं। वैश्यों को पांच, बिश्नोई को दो, जाट सिख को एक, राजपूत को तीन और रोड समाज के दो उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा गया है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 17 सीटों पर भाजपा ने जाटव समाज के आठ और वाल्मीकि समाज के चार उम्मीदवारों को टिकट दिया है। भाजपा का रणनीतिक फोकस इस बार गैर-जाट मतदाताओं पर है, जिनके समर्थन से उसने पहले दो बार सत्ता में वापसी की थी।

कांग्रेस का सबसे अधिक जाटों पर जोर

वहीं, कांग्रेस ने भी टिकटों का आवंटन करते समय सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा है। कांग्रेस ने ओबीसी समाज को 20 सीटों पर टिकट दिए हैं और जाट समुदाय को सबसे अधिक 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने भी 17 सुरक्षित सीटों पर दलित उम्मीदवारों को मौका दिया है, साथ ही ब्राह्मणों को छह और मुस्लिमों को पांच सीटें आवंटित की हैं। पंजाबी और सिख समुदाय को 11-11 टिकट प्रदान किए गए हैं। कांग्रेस ने युवा चेहरों पर भी जोर देते हुए 30 नए उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है, जिनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्यों को दो, राजपूत, बिश्नोई और रोड समाज के एक-एक उम्मीदवार को टिकट मिला है।

प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर मतदान पांच अक्टूबर को होगा और मतगणना आठ अक्टूबर को की जाएगी। दोनों प्रमुख दलों, भाजपा और कांग्रेस, ने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन में सोशल इंजीनियरिंग के सिद्धांत का पालन किया है, ताकि सभी जातिगत समूहों को संतुष्ट किया जा सके और चुनावी समर्थन जुटाया जा सके।

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