Haryana Election Result: भाजपा को मिला गैर जाटों की एकजुटता और दलितों व डेरे का साथ, ये रहे जीत के कारण

Manohar Lal Khattar Nayab Singh Saini

मनोहर लाल और नायब सिंह सैनी।

नरेन्द्र सहारण, चंडीगढ़: Haryana Election Result: हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें जाट और गैर-जाट मतों का ध्रुवीकरण, दलित वोटों में बिखराव और कुछ अन्य सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का योगदान है। इसके साथ ही, चुनाव के दौरान डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को मिली पैरोल का भी भाजपा को फायदा हुआ, चाहे डेरा प्रतिनिधियों ने किसी राजनीतिक दल के समर्थन का सार्वजनिक रूप से ऐलान न किया हो।

जाट, गैर-जाट और दलित मतों का ध्रुवीकरण

 

इस बार चुनावी रण में जाट और गैर-जाट मतदाताओं के बीच एक स्पष्ट विभाजन देखने को मिला। जहां जाट समुदाय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थन में कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होकर मतदान किया, वहीं भाजपा ने गैर-जाट और दलित वोटों में अपनी पकड़ बनाई। भाजपा को दलितों के वोट भी मिले, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। कांग्रेस की उम्मीद के मुताबिक दलित वोट उसके पक्ष में नहीं आए, जिससे पार्टी का प्रदर्शन कमजोर हुआ।

राम रहीम की पैरोल का असर

 

चुनाव से ठीक पहले डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को मिली पैरोल का असर भाजपा के पक्ष में गया। हालांकि डेरा प्रतिनिधियों ने किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करने का औपचारिक संकेत नहीं दिया, फिर भी चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इससे भाजपा को कुछ हद तक लाभ मिला। भाजपा ने इस लाभ को चुनावी मैदान में न सिर्फ गिने-चुने क्षेत्रों में, बल्कि व्यापक स्तर पर महसूस किया, खासकर दलित और गैर-जाट समुदाय के बीच।

राहुल गांधी की रैलियों का असर

 

प्रदेश की चुनावी राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैलियों का भी बड़ा असर देखने को मिला। जहां भी राहुल गांधी ने रैलियां की, वहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के लिए राहुल गांधी की रैलियों का राजनीतिक संदेश कहीं न कहीं नकारात्मक साबित हुआ। राहुल गांधी ने असंध से अपनी चुनावी यात्रा शुरू की थी, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार शमशेर सिंह गोगी हार गए। इसके बाद उन्होंने हिसार के बरवाला में भी रैली की, लेकिन यहां भी कांग्रेस को हार मिली और भाजपा की जीत हुई।

राहुल गांधी की सोनीपत के गोहाना में रैली के दौरान सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन्हें गोहाना के जलेबियां भेंट की थी, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में जलेबियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जोरदार तकरार हुई। यहां भी भाजपा ने चुनाव जीत लिया, और कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व विधायक जगबीर मलिक को हार का सामना करना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों का प्रभाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में चार प्रमुख रैलियां कीं, जो भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई। मोदी की रैलियां कुरुक्षेत्र, सोनीपत, हिसार और फरीदाबाद के पलवल में आयोजित की गईं। इन रैलियों ने न सिर्फ भाजपा को दक्षिण हरियाणा में बढ़त दिलाई, बल्कि मध्य हरियाणा में भी सीटों की संख्या में इजाफा किया और उत्तर हरियाणा में भाजपा के पुराने प्रभाव को कायम रखा।

प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों के अलावा, पार्टी ने बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं से संवाद भी किया, जिसमें मोदी ने उन्हें जीत के मंत्र दिए। भाजपा की यह रणनीति न केवल पार्टी के लिए फायदेमंद रही, बल्कि यह पार्टी की तीसरी बार जीत की एक बड़ी वजह भी बनी।

कई फैक्टर ने काम किया

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के कई फैक्टर मिलकर काम करते नजर आए। जाट और गैर-जाट मतदाताओं का ध्रुवीकरण, दलित वोटों का भाजपा के पक्ष में मुड़ना, राम रहीम की पैरोल का अप्रत्यक्ष लाभ और राहुल गांधी की रैलियों का नकारात्मक असर, भाजपा की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी रैलियों ने पार्टी की जीत को सुनिश्चित किया, जबकि कांग्रेस के लिए हार के कई कारण रहे, जिनमें दलित वोटों का न मिलना और राहुल गांधी की रैलियों का असर शामिल था।

 

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