Haryana Politics: जानें कैसा रहा मनोहर लाल साढ़े नौ साल का कार्यकाल, किन-किन क्षेत्रों में मिली कामयाबी
नरेन्द्र सहारण, चंडीगढ़: Haryana Politics: हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल का साढ़े नौ साल का कार्यकाल बेहद साफ-सुथरा और दाग रहित रहा है। इस अवधि में मनोहर लाल के कार्यकाल में कई तरह के राजनीतिक व सामाजिक उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन अपने सरल व्यवहार, ईमानदार छवि, रणनीतिक कौशल और सबको साथ लेकर चलने की प्रवृत्ति के चलते मनोहर लाल ने इन सभी चुनौतियों पर बड़ी आसानी के साथ पार पा लिया। मनोहर लाल के अलावा प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री रहा होगा, जो बिना किसी विवाद के अपना कार्यकाल पूरा कर नई भूमिका में जाने के लिए मुख्यमंत्री निवास से रुखसत हुआ है।
कार्यकाल में किए कई प्रयोग
प्रदेश में सबसे अधिक लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नाम है, जिन्होंने नौ साल 235 दिनों तक हरियाणा की सत्ता चलाई। निवर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल का इस पद पर कार्यकाल नौ साल 138 दिनों का रहा है, जो कि हुड्डा के कार्यकाल से मात्र 97 दिन कम है। अपने कार्यकाल में मनोहर लाल ने कई ऐसे प्रयोग किए, जिन्हें न केवल राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिली, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपने राज्यों में लागू करने के लिए भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को प्रेरित भी किया। मनोहर लाल की स्वामित्व योजना स्वयं केंद्र सरकार ने पूरे देश में लागू की, जिसमें गांवों में लाल डोरे के बाहर की जमीन के पंजीकरण की सुविधा प्रदान करते हुए जमीनों के लिए होने वाले झगड़ों को हमेशा के लिए बंद कर दिया।
विरोधियों को भी करनी पड़ी तारीफ
हरियाणा विधानसभा के विभिन्न सत्रों में कई मौके ऐसे आए, जब विपक्ष के विधायकों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर मनोहर लाल की ईमानदार छवि और पक्षपात रहित कार्यप्रणाली की दिल खोलकर तारीफ की। विपक्ष को मनोहर लाल से कोई नाराजगी कभी नहीं रही। भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक ने मनोहर लाल की कार्यप्रणाली को सराहा, लेकिन पार्टी स्तर पर जरूर उन्हें विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद बड़ी बात यह रही कि मनोहर लाल ने अपने कार्यकाल में किसी भी नेता के विरुद्ध राजनीतिक बदले की भावना से कभी कोई कार्रवाई नहीं की। मनोहर लाल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि सरकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण और मैरिट के आधार पर सरकारी नौकरियों का वितरण रहा है। शिक्षकों को अपने तबादले कराने के लिए मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के कार्यालयों में चक्कर लगाने पड़ते थे, मगर जब न केवल शिक्षा विभाग बल्कि बाकी सरकारी विभागों के तबादलों को भी मनोहर लाल ने अपने कार्यकाल में आनलाइन कर दिया है, जिससे राजनीतिक व आर्थिक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है।
भ्रष्टाचारियों के काल बने मनोहर लाल
मनोहर लाल का साढ़े नौ साल का कार्यकाल भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के रूप में जाना जाएगा। राजनीतिक गलियारों में यह बात खूब चली कि ऊपर (सीएमओ) के स्तर पर राज्य में भ्रष्टाचार नहीं है। भले ही निचले स्तर पर इसे रोकने में सरकार के पसीने छूट गए हों। करीब 200 भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई मनोहर सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है। सरकारी योजनाओं के डिजिटलीकरण और परिवार पहचान पत्र के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसा भेजने की प्रणाली का यह लाभ हुआ कि हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये की बचत सरकार ने की, जो पूर्व में भ्रष्टाचारियों की जेब में जा रही थी। यह पैसा लोगों के विकास पर खर्च हुआ। जीएसटी संग्रहण बढ़ा। बिजली की चोरी रुकने के साथ ही करीब साढ़े पांच हजार गांवों में 24 घंटे बिजली, कन्या लिंग अनुपात में सुधार और हर घर में नल से जल पहुंचाने में मनोहर सरकार कामयाब रही।
किसानों की जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं
निवर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने कार्यकाल में हरियाणा एक-हरियाणवी एक तथा सबका साथ-सबका विकास की अवधारणा को पूरी तरह से आत्मसात करते हुए काम किया है। उन्होंने दक्षिण हरियाणा में नहरों से पानी पहुंचाने में कामयाबी हासिल की तो साथ ही एसवाईएल नहर के निर्माण में कानूनी पक्ष मजबूत किया। राज्य में किसी भी सरकारी परियोजना के लिए किसानों से जबरन जमीन अधिगृहीत नहीं की गई। किसानों से उनकी मर्जी के आधार पर जमीन खरीदी गई। प्रदेश की अधिकतर आबादी को मनोहर लाल ने चिरायु हरियाणा योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा में कवर कर उनकी चिंता खत्म कर दी। विधायक चाहे किसी भी दल का रहा हो, मनोहर लाल ने जो भी आया, उसका काम किया।
