Haryana Politics: जानें क्यों राजनीति के मैदान में अक्सर चित हुए खिलाड़ी, विनेश फोगाट को खुद को साबित करने की चुनौती

Haryana Players

राजनीति में दांव लगाने को तैयार खिलाड़ी।

नरेन्द्र सहारण, चंडीगढ़। Haryana Politics: हरियाणा में सियासी अखाड़े में अक्सर खिलाड़ी आउट हुए। अतीत की परवाह से दूर राजनीति के मैदान में नए खिलाड़ी विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया उतरे हैं। विनेश फोगाट को कांग्रेस ने जींद जिले की जुलाना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है, जबकि बजरंग पूनिया को अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया है। बता दें कि तीन बार सांसद बन केंद्रीय मंत्री रहे तथा पांच बार के विधायक चौधरी बीरेंद्र सिंह सहित प्रदेश के अनेक अखाड़ेबाज राजनीति के मैदान में अपना लक्ष्य नहीं हासिल कर सके। चौधरी बीरेंद्र सिंह का मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया तो ओलिंपियन योगेश्वर दत्त भी चित हो गए। दंगल गर्ल बबीता का दाव नहीं चल सका, बिजेंद्र सिंह का पंच लक्ष्य से दूर रहा। राजनीतिक पिच पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रणबीर महेंद्रा सरीखे धुरंधर हिट विकेट होकर पैवेलियन लौट गए।

पहलवान योगेश्वर दत्त कई बार हुए चित

 

पहलवान योगेश्वर दत्त कुश्ती का अखाड़ा छोड़कर सियासी दंगल में कूदे। 2019 में भाजपा ने उन्हें बरौदा विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी से पटकनी मिली। इसके बाद कांग्रेस के इंदुराज नरवाल भालू से चित हो गए। इस बार विधानसभा चुनाव में योगेश्वर दत्त को उम्मीद है कि पार्टी उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।

दंगल गर्ल 2019 में आई राजनीति में

 

दंगल गर्ल बबीता फोगाट 2019 में दादरी से चुनावी अखाड़े में उतरीं लेकिन जीत नहीं पाई। तभी से वह भाजपा के लिए काम कर रहीं हैं। भाजपा ने उन्हें पार्टी में खूब मान-सम्मान दिया। राज्य महिला विकास निगम का चेयरपर्सन भी बनाया, लेकिन 2024 में पार्टी ने उन पर भरोसा नहीं जताया।

संदीप सिंह का राजनीतिक सफर विवादों भरा

 

2019 में भाजपा ने हाकी खिलाड़ी संदीप सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। पिहोवा से विधायक निर्वाचित हुए, संदीप सिंह को मनोहर सरकार में खेल राज्यमंत्री बनाया गया। मगर महिला कोच से छेड़छाड़ के विवाद में फंसने के बाद संदीप सिंह का राजनीतिक करियर ही खत्म हो गया।

रणबीर महेंद्रा भी सियासी पिच पर सफल नहीं

 

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रहे रणबीर महेंद्रा एक बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2009, 2014 और 2019 में बाढ़डा से कांग्रेस की सीट पर चुनाव लड़े, मगर हर बार हिट विकेट ही हुए।

राजनीतिक रिंग में बाक्सर बिजेंद्र सिंह अस्थिर

 

बाक्सर बिजेंद्र सिंह बाक्सिंग रिंग को छोड़कर राजनीतिक पिच पर उतरे, लेकिन पहली बार में ही आउट हो गए। 2019 में लोकसभा चुनाव में बिजेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर दक्षिणी दिल्ली से चुनाव मैदान में जरूर उतरे, जीतना तो दूर, अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।

विनेश को साबित करने की चुनौती

 

पेरिस ओलिंपिक में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से बाहर हुई पहलवान विनेश फोगाट को कांग्रेस ने जुलाना से प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। कांग्रेस में शामिल होने के महज आठ घंटे बाद ही वह चुनावी मैदान में उतर गई। अब उनके सामने राजनीति के मैदान में खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है।

बजरंग पूनिया को करना होगा इंतजार

ओलिंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया ने विनेश फोगाट के साथ कांग्रेस का हाथ थामा। हाल ही, अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त बजरंग बादली हलके से टिकट मांग रहे थे। वहां दीपेंद्र हुड्डा के करीबी कुलदीप वत्स मौजूदा विधायक हैं। इसलिए उन्हें थोड़ा इंतजार करने को कहा गया है।

 

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