Loksabha Election 2024: दिल्ली में रोचक हुआ मुकाबला! उत्तर पूर्व दिल्ली में मनोज तिवारी Vs कन्हैया कुमार, समझिए सियासी समीकरण

Manoj Tiwari Kanhaiya Kumar

मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार। फाइल

नई दिल्ली, बीएनएम न्यूज। Loksabha Election 2024 : 14 अप्रैल को कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली में अपने खाते की तीनों सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। कांग्रेस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट से कन्हैया कुमार को मैदान में उतारा है। इस चुनाव में भाजपा से दो बार के सांसद रहे और भोजपुरी फिल्म स्टार मनोज तिवारी के खिलाफ चुनाव कन्हैया कुमार लड़ेंगे। कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल होने से पहले वह लेफ्ट का चेहरा रहे हैं। 2019 के चुनाव में कन्हैया को लेफ्ट ने मोदी सरकार के फायरब्रांड मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ बेगूसराय सीट से उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, तब वह हार गए थे। कांग्रेस ने फिर उन पर विश्वास जताया है। मनोज तिवारी बिहार के कैमूर जिले के निवासी हैं तो कन्हैया कुमार भी बिहार के बेगूसराय से आते हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली लड़ना चाहते थे लेकिन राहुल गांधी ने खुद कन्हैया कुमार की पैरवी की। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाला उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय इलाका अपनी चुनौतियों के साथ एक चुनावी हॉटस्पॉट रहा है। कन्हैया के भाषणों में गरीब-मजदूर-दलित-शोषित-वंचित की बात अधिक रहती है। नॉर्थ ईस्ट लोकसभा क्षेत्र में बड़ी तादाद यूपी, बिहार, हरियाणा जैसे राज्यों राज्यों से आकर मेहनत-मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे मजदूरों की है। कन्हैया कुमार अपने भाषणों में लगातार युवाओं और रोजगार के साथ ही दलित-पिछड़े और दबे-कुचले वर्गों की बात करते हैं। ऐसे में दो बड़े चेहरों का मैदान में उतरने के कारण यह देखना दिलचस्प होगा कि इस इलाके में सत्ता के मैदान में कौन बाजी मारता है-

आइये जानते हैं इस लोकसभा सीट के सियासी समीकरण के बारे में

 

नार्थ ईस्ट सीट को पूरे भारतवर्ष का सबसे सघन आबादी वाला इलाका माना जाता है और यहां सबसे ज्यादा आबादी पूर्वांचल के लोगों की है। इस लोकसभा सीट में कई ऐसी अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जहां पर अलग-अलग राज्यों से प्रवासी लोग बसे हैं। वहीं उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीमा यूपी से लगने के कारण यहां मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा की प्रवासी आबादी शामिल है। पिछले 10 साल से सांसद मनोज तिवारी को लेकर एंटी इनकम्बेंसी कैश कराने की कोशिश में जुटी कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के समर्थन से एकमुश्त दलित-मुस्लिम-ओबीसी वोट की आस है। कांग्रेस नेताओं को लगता है कि थोड़े-बहुत पूर्वांचली वोटर्स का साथ भी मिल गया तो यह बफर का काम करेगा और ऐसे में पार्टी के यहां से जीतने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। दूसरी तरफ, बीजेपी को भरोसा है कि पूर्वांचली और दलित-पिछड़ा वोटर्स के समर्थन से मनोज तिवारी जीत की हैट्रिक लगाएंगे। दो पूर्वांचलियों की लड़ाई में ओबीसी-दलित के साथ ही सवर्ण वोटर्स का रोल अहम हो गया है। कहा यह भी जा रहा है कि पूर्वांचली वोट स्थानीय अस्मिता के आधार पर बंट सकता है. मनोज तिवारी भोजपुरी बेल्ट से आते हैं। वहीं, कन्हैया कुमार जिस बेगूसराय से आते हैं, वहां अंगिका और मगही भाषा बोली जाती है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में भोजपुरी भाषी वोटर्स की संख्या अच्छी खासी है और यह मनोज तिवारी के पक्ष में जा सकता है।

 

राजधानी का सबसे बड़ा जिला

 

उत्तर पूर्वी दिल्ली इलाका देश की राजधानी का सबसे बड़ा जिला है। इस लोकसभा सीट में 10 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें बुराड़ी, तिमारपुर, सीलमपुर, घोंडा, बाबरपुर, गोकलपुर, सीमापुरी, रोहतास नगर, मुस्तफाबाद और करावल नगर शामिल है. इस सीट की खासियत यही है कि यहां कई अलग अलग समुदायों की आबादी निवास करती है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली इलाके में लगभग 16.3 फीसदी अनुसूचित जाति, 11.61 फीसदी ब्राह्मण, 20.74 फीसदी मुस्लिम, 4.68 फीसदी वैश्य (बनिया), 4 प्रतिशत पंजाबी, 7.57 प्रतिशत गुर्जर और 21.75 फीसदी ओबीसी समुदाय के लोग हिस्सेदारी रखते हैं।

पिछले चुनाव में किसकी जीत

2009 का लोकसभा चुनाव

 

अब इस सीट के पुराने चुनावी नतीजों को देखें तो साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से जेपी अग्रवाल को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में बीजेपी के तरफ से बीएल शर्मा प्रेम मैदान में थे और कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ 59.03 प्रतिशत वोटों के साथ भारी बढ़त हासिल की थी। साल 2009 के चुनाव में भाजपा को केवल 33.71 फीसदी वोट मिले थे।

2014 का लोकसभा चुनाव

 

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के मनोज तिवारी को 45.38 प्रतिशत वोट मिला था, जबकि आम आदमी पार्टी की तरफ से मैदान में उतरे आनंद कुमार को 34.41 प्रतिशत और कांग्रेस को सिर्फ 16.05 प्रतिशत वोट मिला था।

2019 का लोकसभा चुनाव

 

2019 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा एक बार फिर मजबूत हुई और इसी पार्टी के प्रत्याशी मनोज तिवारी को 53.86 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस की तरफ से शीला दीक्षित मैदान में उतरी थी और उन्हें 28.83 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडेय को सिर्फ 13.05 फीसदी वोट मिल सका।

इस बार के दोनों चेहरे जनता के बीच काफी लोकप्रिय

इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार जनता के बीच काफी मशहूर है। एक तरफ जहां मनोज तिवारी राजनीति से हटकर अभिनेता और गायक के तौर पर भी काफी लोकप्रिय हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार की छवि युवाओं का मुद्दा उठाने वाले नेता की है। वह एनएसयूआई के एआईसीसी इंचार्ज हैं और खास तौर पर युवाओं से जुड़े मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं। कन्हैया कुमार इस लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की दोनों भारत जोड़ो यात्रा में भी काफी सक्रिय नजर आए थे। उन्होंने इन यात्राओं में युवाओं को साथ जोड़ने में काफी अहम भूमिका निभाई है। वहीं दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से केवल एक ही मौजूदा सांसद मनोज तिवारी को टिकट दिया गया।

दिल्ली का भविष्य तय करेगी ये सीट

वर्तमान में आम आदमी पार्टी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कई आरोपों में घिरे हुए हैं। ऐसे मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार दोनों प्रत्याशी में दिल्ली की राजनीति में पार्टी को नेतृत्व देने की काफी क्षमता मौजूद है और अगर दोनों में से कोई एक जीतता है तो पार्टी उसे कांग्रेस या बीजेपी दिल्ली के भविष्य के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकती है।

इस सीट के अलावा कांग्रेस ने बाकी सीटों पर किसे उतारा

 

कांग्रेस की ताजा लिस्ट में 10 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, जिसमें राजधानी दिल्ली के तीन उम्मीदवार, पंजाब के लिए छह और उत्तर प्रदेश के लिए एक उम्मीदवार का नाम शामिल है। पार्टी ने जेपी अग्रवाल को चांदनी चौक से टिकट दिया है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो इस सीट से अलका लांबा और संदीप दीक्षित लड़ना चाहते थे। हालांकि कांग्रेस ने दोनों को ही इस सीट से महरूम रखा। वहीं उत्तरी पश्चिम दिल्ली से कांग्रेस की तरफ से उदित राज चुनाव लड़ेंगे।

राजधानी में पिछले चुनाव में बीजेपी ने किया था क्लीन स्वीप

राजधानी दिल्ली में कुल 1.47 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था। जबकि दूसरा स्थान कांग्रेस का था। कांग्रेस को 25 फीसदी और आम आदमी पार्टी को 18.1 प्रतिशत वोट मिले थे। 2014 में बीजेपी को 46.4 फीसदी वोट मिले थे।

 

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