कैथल में तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत: खेलने के बाद नहाने गए, बारिश में कीचड़ के कारण पैर फिसला

नरेन्‍द्र सहारण, कैथल : Kaithal News: कैथल जिले का एक शांतिप्रिय और ऐतिहासिक गांव सारण अचानक हुई एक दुखद खबर के कारण पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। तालाब में डूबने से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। यह हादसा न केवल बच्चों के परिवारों के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक बड़ा आघात है, जिसमें सामाजिक, प्रशासनिक और पर्यावरणीय पहलुओं को भी समझना जरूरी हो जाता है।

घटना का संक्षिप्त विवरण

 

सारण गांव में मंगलवार की दोपहर भारी बारिश के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ। तीन बच्चे, जो घर से बाहर खेलने निकले थे, अचानक तालाब में डूब गए। ये बच्चे सातवीं, तीसरी और चौथी कक्षा के छात्र थे। उनके नाम हैं अक्ष (12 वर्ष), नमन (10 वर्ष) और वंश (11 वर्ष)। तीनों बच्चे चचेरे भाई थे और घर से खेलने निकले थे।

मौसम की बिगड़ती स्थिति और भारी वर्षा के कारण तालाब में पानी भर गया था, साथ ही पहले से ही जेसीबी से खोदा गया गहरा गड्ढा भी पानी में डूब गया था। बच्चे नहाने के दौरान फिसलकर इस गहरे गड्ढे में गिर गए। काफी देर तक घर वापस न लौटने पर स्वजनों को चिंता हुई, और जब पता चला कि बच्चे तालाब में हैं, तो तुरंत ही राहत कार्य शुरू हुआ। तीनों बच्चों को लगभग 15 फीट गहरे गड्ढे से बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हादसे का प्रारंभ बारिश और गड्ढे का निर्माण

कहानी तब शुरू होती है जब कई दिन पहले गांव के खेतों और सरकारी जमीन पर जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर गहरा गड्ढा खोदा गया था। यह गड्ढा ग्रामीणों के अनुसार मुआवजे या निर्माण कार्य के लिए खोदा गया था। लेकिन भारी बारिश के कारण, यह गड्ढा पानी से भर गया। बारिश का मौसम आमतौर पर बच्चों के खेलने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है, लेकिन ग्रामीण अक्सर अपने घरों के आस-पास नन्हें बच्चों को खेलने की छूट देते हैं।

बच्चों का घर से बाहर निकलना और हादसा

 

मंगलवार दोपहर अक्ष, नमन और वंश अपने घर से खेलने निकले। नमन की बहन भी वहां थी, जिसने घर जाकर हादसे की जानकारी दी। तीनों बच्चे नहाने के लिए तालाब के पास गए थे। बारिश की वजह से मिट्टी गीली और फिसलन भरी थी। बच्चे पानी में नहाने लगे, इसी दौरान उनका फिसलना शुरू हो गया। देखते ही देखते, वे गहरे गड्ढे में गिर गए, जो पहले से ही बना था और पानी से पूरी तरह भर चुका था।

राहत कार्य और शवों का निकालना

 

जब काफी देर तक बच्चे घर नहीं लौटे तो स्वजनों को चिंता हुई। जब पता चला कि बच्चे तालाब में हैं तो लोग दौड़ पड़े। ग्रामीणों और परिवार वालों ने मिलकर राहत कार्य शुरू किया। लगभग 15 फीट गहरे गड्ढे से तीनों शवों को बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।

परिवार और गांव का माहौल

 

तीनों बच्चे चचेरे भाई थे, जिनमें नमन एकलौता बेटा था। अक्ष बड़ा भाई था, जबकि वंश छोटा। तीनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। गांव में मातम का माहौल है। बच्चे के पिता राजेश, माता राकेश और अन्य परिजन गमगीन हैं। नमन के घर मातम पसरा हुआ है, और पूरा गांव शोक में डूबा है।

गड्ढे का निर्माण और उसकी खतरनाक स्थिति

 

गांव में जेसीबी से खोदे गए गड्ढे का कोई चिन्हित निशान या चेतावनी संकेत नहीं था। बारिश के कारण, यह गड्ढा पानी से भर गया और उसकी गहराई का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था। बच्चों की उम्र और फिसलन भरी मिट्टी ने स्थिति और भी खतरनाक बना दी।

मानसिकता और ग्रामीण जीवनशैली

 

गांव में बच्चों को खेलने के लिए खुले में स्वतंत्रता मिलती है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और बचाव के उपाय नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं अक्सर होती हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदारी

 

स्वजनों ने बिना पोस्टमार्टम करवाए ही शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने मामले की पुष्टि की है कि मौत का कारण डूबना है, और घटना का जिम्मेदार कोई विशेष व्यक्ति या संस्था नहीं बताई गई है।

गांव का माहौल और सामाजिक प्रभाव

 

तीनों बच्चों की मौत से गांव में शोक व्याप्त है। उनके परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे गांव के चहल-पहल का हिस्सा थे, और उनकी मौत ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। गांव में चूल्हा तक नहीं जला, और लोगों में डर और आक्रोश व्याप्त है।

मौखिक संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी

 

गांव के सरपंच प्रतिनिधि जसवंत ने कहा कि बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपाय करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।

प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई

 

तितरम थाना प्रभारी कृष्ण कुमार ने बताया कि हादसे की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि स्वजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही शवों का संस्कार कर दिया है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया सीमित रही।

संबंधित विभाग की भूमिका

 

गांव में सुरक्षा उपायों की कमी और जागरूकता के अभाव में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए प्रशासन ने सुझाव दिया है कि गड्ढों को आवश्‍यक संकेतक, चेतावनी बोर्ड और बंद किया जाए। साथ ही, बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने का भी प्रस्ताव है।

भविष्य के लिए सुझाव और कदम

 

सार्वजनिक जागरूकता: ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा और जलभराव से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।

सड़क और निर्माण कार्य की निगरानी: निर्माण स्थल या गड्ढों की नियमित निगरानी और संकेतक लगाना।

सुरक्षा उपाय: तालाबों और खाली जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाना और बच्चों की खेलकूद की जगहों का चयन सावधानी से करना।

प्रशासनिक कार्रवाई: ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही

 

गांव सारण का यह हादसा एक गहरा सामाजिक और प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। यह घटना न केवल बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम है बल्कि ग्रामीण जीवन की जटिलताओं और जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। इस दुखद घटना से सीख लेकर, आवश्यक कदम उठाना और जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं। हर बच्चे का जीवन अनमोल है, और उसकी सुरक्षा हर समाज की जिम्मेदारी। प्रशासन और समाज दोनों मिलकर ही ऐसे हादसों को रोक सकते हैं और बच्चों के सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

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