रोहतक के जाट कालेज अखाड़ा हत्याकांड में दोषी सुखविंदर कोच को मौत की सजा, जज की सख्त टिप्पणी

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नरेन्द्र सहारण, रोहतक: Rohtak Jat College Akhara Massacre: तीन साल पहले हुए रोहतक के जाट कालेज अखाड़ा हत्याकांड में शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषी सुखविंदर कोच को मौत की सजा सुनाई है। एएसजे (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) डा. गगनगीत कौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 288 पेज का फैसला ही इस टिप्पणी के साथ ही शुरू किया कि ये हत्याकांड नहीं नरसंहार था। इसमें दोषी सुखविंदर को मौत से कम सजा नहीं दी जा सकती। इसने जिन छह लोगों की जान ली उसमें एक दो साल 10 माह का बच्चा और एक नाबालिग महिला खिलाड़ी भी थी। ये क्रूर से भी क्रूरतम है। कोर्ट ने सुखविंदर कोच को छह हत्याओं के मामले में मौत की सजा के अलावा कोच अमरजीत को गोली मारने के हत्या प्रयास मामले में भी आजीवन कारावास की सजा दी है। वहीं इस हत्याकांड में सुखविंदर को हथियार उपलब्ध कराने के दोषी उत्तर प्रदेश के शामली निवासी मनोज फौजी को तीन साल जेल की सजा सुनाई है।

6 लोगों की हुई थी हत्या

आपको बता दें कि 12 फरवरी 2021 को जाट कॉलेज अखाड़ा में बड़ा हत्याकांड हुआ था। इस दौरान कुश्ती कोच मनोज मलिक, पत्नी साक्षी मलिक, 4 साल के बेटे सरताज, खिलाड़ी प्रदीप मलिक, पूजा तोमर और कोच सतीश मांडौठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं एक दूसरे कोच अमरजीत को भी सुखविंदर ने गोली मारी थी जिसमें वो घायल हो गया था और उसकी जान बच गई थी। वहीं रोहतक पुलिस ने हत्याकांड की जांच करते हुए मर्डर के मुख्य आरोपी सोनीपत के बरौदा गांव के कोच सुखविंदर और यूपी मनोज को हथियार सप्लाई के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने 19 फरवरी को इन आरोपियों को दोषी ठहराया था। वहीं 21 फरवरी को सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इन सेक्शन में सुखविंद्र को हुई सजा

 

IPC302: मौत की सजा

IPC 307: आजीवन कारावास, एक लाख जुर्माना या एक साल की अतिरिक्त जेल

IPC 342 : एक साल, एक हजार रुपये जुर्माना या 10 दिन की जेल

IPC 201: सात साल, 10 हजार रुपये जुर्माना या छह माह कारावास

सुनारिया नहीं करनाल जेल में काटेगा सजा

 

 

मौत की सजा पा चुका सुखविंदर कोच अब अपनी सजा के दिन करनाल जेल में काटेगा। कोर्ट के आदेश पर उसे करनाल जेल शिफ्ट किया गया है। शुक्रवार शाम को ही रोहतक से कड़ी सुरक्षा में उसे करनाल पुलिस यहां से लेकर गई।

इतना क्रूर कोई नहीं देखा…

 

कोर्ट ने जाट कालेज अखाड़ा हत्याकांड में अपने फैसले में छह मृतकों के मामले में दो साल 10 माह के सरताज और 16 साल की पूजा तोमर की हत्या करने पर विशेष टिप्पणी की है। कोर्ट ने फैसले में सुखविंदर को लेकर कहा कि इतना निर्दयी, क्रूर कोई नहीं देखा। इसने जो किया है उसमें न खिलाड़ी, न दोस्त, न कोच, न पिता किसी की भावना का कोई अंश नजर नहीं आया। मासूम सरताज को ये उसकी मां साक्षी के शव के पास लेकर गया। रोने लगा तो बगैर किसी रहम के उसने इसके सिर में पीछे गोली मार दी।

सरकार खेल मैदान-अखाड़ा-स्टेडियम में सुरक्षा दे

 

कोर्ट ने अपना फैसला खत्म करने से पहले सबसे आखिर में सरकार को प्रदेश के सभी खेल मैदान, अखाड़ा और स्टेडियम में सुरक्षा प्रबंध विशेषकर शाम के समय कड़े करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि खेल और ये मैदान हमारे देश-समाज का भविष्य हैं। आमजन के पास घर पर ही बच्चों के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है। उन्हें इन जगह जाना ही पड़ता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे नरसंहार के बाद इन जगहों पर सुरक्षा की दिशा में सभी जरूरी उपाय पूरे करें।

परिवार ने जताई खुशी

 

फैसले के बाद मृतक मनोज मलिक के भाई प्रमोज ने कहा है कि वो अदालत के फैसले से खुश है। वहीं मृतक प्रदीप मलिक के भाई विक्रम मलिक ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है। वहीं दोषी सुखविंदर के वकील गौरव ढुल ने कहा है कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। फांसी की सजा दिए जाने के बाद कोच सुखविंदर को वापस करनाल की जेल भेज दिया गया है।

क्या थी हत्या की वजह ?

दरअसल, जाट कॉलेज अखाड़ा के सीनियर कोच मनोज मलिक ने सुखविंदर को शिकायतों के बाद अखाड़े में आने से मना कर दिया था। सुखविंदर के खिलाफ कुछ महिला खिलाड़ियों ने शिकायतें दी थी, जिसके बाद ये कदम मनोज मलिक ने उठाया था। इस बात से सुखविंदर नाराज़ था और इसके बाद उसने इस बड़े हत्याकांड को अंजाम दे दिया।

 

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