अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को भेजा जवाब: 31 प्वाइंट्स में यमुना के पानी में अमोनिया संकट और दिल्ली की जल समस्या पर रखी अपनी बात

Arvind Kejriwal in Bhiwani

नई दिल्ली, बीएनएम न्‍यूज : दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक, अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में हरियाणा से छोड़े जा रहे पानी में ‘जहर’ होने के आरोप के संबंध में चुनाव आयोग को एक विस्तृत पत्र लिखा है। यह पत्र चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब देने के लिए था, जिसमें उनसे यमुना नदी के पानी में अमोनिया की बढ़ी हुई मात्रा पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। केजरीवाल ने यह स्पष्ट किया है कि उनके बयान व्यावसायिक वास्तविकताओं पर आधारित हैं और उन्होंने किसी भी तरह की आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है।

पानी के प्रदूषण स्तर की गंभीरता

 

केजरीवाल के 14 पन्नों और 31 बिंदुओं के उत्तर में यह बताया गया है कि दिल्ली को यमुना से कच्चा पानी प्राप्त होता है, जो अब बेहद जहरीला हो गया है। उन्होंने इस पानी के प्रदूषण स्तर की गंभीरता को उजागर करते हुए बताया कि यह पानी दिल्ली के जल उपचार संयंत्रों की क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप, राजधानी में साफ पानी की भारी कमी हो रही है।

जहरीले पानी का खतरा

केजरीवाल ने पत्र में उल्लेख किया कि हाल ही में यमुना से मिलने वाला कच्चा पानी प्रदूषण के उच्चतम स्तर पर है, जिसकी वजह से जल उपचार संयंत्र इसे ठीक से साफ नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यमुना के पानी में अमोनिया की मात्रा 7 पीपीएम है, जो मानक सीमा से 700 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति न केवल दिल्ली की नागरिकों की स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह महामारी का कारण भी बन सकती है।

इसके अतिरिक्त केजरीवाल ने हरियाणा द्वारा औद्योगिक कचरे को बिना रोक-टोक के यमुना में छोड़ने को इस समस्या का मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि यदि ऐसे जहरीले पानी का प्रवाह जारी रहा, तो यह दिल्ली के निवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर सकता है।

मानवाधिकार के रूप में स्वच्छ पानी

अरविंद केजरीवाल ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि हर व्यक्ति का स्वच्छ पानी तक पहुंच एक मौलिक मानवाधिकार है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाने को किसी भी तरह से अपराध मानنے के खिलाफ अपनी बात रखी। केजरीवाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह आवश्यक है कि इस समस्या के प्रति सही तरह से ध्यान दिया जाए और प्रशासनिक कदम उठाए जाएं ताकि दिल्ली के निवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

एक उचित समाधान की मांग

पत्र में केजरीवाल ने चुनाव आयोग से अपील की है कि वह हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दे, ताकि वह दिल्ली को जिस प्रकार का पानी उपलब्ध करा रही है, उसकी गुणवत्ता में सुधार करें। उन्होंने कहा कि यह साफ पानी न केवल दिल्ली की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह राज्य के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

किसी भी समाज में जल की गुणवत्ता ने उसके सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण को खतरे में डाल सकती है। केजरीवाल ने यह मुद्दा उठाने में कोई संकोच नहीं किया, यह दर्शाते हुए कि दिल्ली की जल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

जहरीले पानी का विरोध

 

अंत में अरविंद केजरीवाल का यह पत्र न केवल हरियाणा से आ रहे जहरीले पानी का विरोध करने का एक प्रयास है, बल्कि यह जल संकट के समाधान के लिए एक ठोस कदम भी है। उन्होंने यथार्थता को उजागर करते हुए यह स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित हैं और दिल्ली के निवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।

इस घटनाक्रम ने जल संकट, प्रदूषण, और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों को एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना दिया है। अब इस मुद्दे पर अधिकारियों और राजनीतिक धाराओं का ध्यान पूरी तत्परता के साथ केंद्रित होना आवश्यक है ताकि दिल्लीवासियों को दी जाने वाली जल आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

इस प्रकार अरविंद केजरीवाल का पत्र राजनीतिक जिम्मेदारी, जनहित, और स्वास्थ्य की सुरक्षा को एक साथ लाने का एक स्पष्ट संकेत है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि उचित स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित जल आपूर्ति हर नागरिक का अधिकार है।

 

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