हरियाणा सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, जबरन सेवानिवृत्ति की नई नीति को लागू किया

nayab singh saini

नरेन्‍द्र सहारण, चंडीगढ़ : Strict Action Against Corruption: हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने की प्रक्रिया को लागू किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी प्रणाली को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है। हाल ही में, हरियाणा सिविल सर्विस के अधिकारी रीगन कुमार को जबरन रिटायर करने के बाद, अब ग्रुप बी के अधिकारियों की एक्सटेंशन पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस दिशा में गंभीर है।

अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइंस

सरकार के द्वारा जारी की गई हरियाणा राज्य के अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब 55 वर्ष की आयु में सरकारी नौकरी के लिए एक्सटेंशन की समीक्षा की जाएगी। पहले यह आयु सीमा 58 वर्ष थी, लेकिन अब इसे घटाकर 50 वर्ष कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि जो अधिकारी 50 वर्ष के हो गए हैं, उनकी नियुक्तियों की समीक्षा की जाएगी, यह देखने के लिए कि क्या वे भ्रष्टाचार में लिप्त हैं या नहीं। इस प्रक्रिया में अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्टों को आधार बनाया जाएगा, और यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत पकड़ा गया है, तो उसे 50 वर्ष की आयु के बाद सरकारी सेवा में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

155 रिश्वतखोरी के मामलों में से 104 ट्रैप किए गए

हरियाणा में एंटी करप्शन ब्यूरो का सक्रिय होना इस नीति का एक हिस्सा है। 2024 में हुए 155 रिश्वतखोरी के मामलों में से 104 ट्रैप किए गए। इनमें से कई मामले विभिन्न विभागों के अधिकारियों के खिलाफ थे, जिसमें राजपत्रित, अराजपत्रित और निजी व्यक्तियों का समावेश था। यह दर्शाता है कि हरियाणा में भ्रष्टाचार की समस्याएं कितनी गंभीर हैं और सरकार इस पर काबू पाने के लिए कितनी गंभीर है।

सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सरकारी सिस्टम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। इसके लिए लगातार उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ हमारी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को कोई छूट न मिले।”

इस स्पष्ट नीति से यह उम्मीद की जा रही है कि हरियाणा में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारियों के मन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक डर पैदा होगा। कुछ अधिकारी जो पहले यह सोचते थे कि उन पर सेवानिवृत्ति की तलवार लटकने से वे सुरक्षित हैं, अब उन्हें सतर्क रहना होगा क्योंकि सरकार ने उनकी आयु सीमा के भीतर जल्दी ही समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट

इस नई नीति में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का भी ध्यान रखा जाएगा। यदि किसी अधिकारी ने किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में संलिप्तता दिखाई, तो उसे अब सरकारी सेवा में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार केवल कार्रवाई नहीं करेगी, बल्कि उन अधिकारियों की योग्यता और नैतिकता पर भी ध्यान देगी जो सरकारी पदों पर आसीन हैं।

कठोर निर्णय लिए जाएंगे

सरकार के इस कदम का आम जनता में बड़ा समर्थन है। सामान्य नागरिकों का मानना है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ऐसे कठोर निर्णय लिए जाएंगे तो इससे सरकारी प्रणाली में सुधार होगा और उन लोगों को न्याय मिलेगा जो सरकारी सेवाओं का इंतजार कर रहे हैं। यह निर्णय न केवल उन अधिकारियों के लिए सख्ती भरा है जो अपनी सीमाओं को लांघ रहे हैं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से ले रही है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस युद्ध में केवल उच्च अधिकारी ही नहीं, बल्कि नीचे के स्तर तक के कर्मचारियों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। राज्य सरकार की नई दृष्टिकोण में यह एक स्पष्ट संकेत है कि अब कर्मचारी या अधिकारी चाहे कितने भी उच्च पद पर हों यदि वे भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए, तो कोई भी उन पर दया नहीं करेगा।

हरियाणा सरकार की यह नई नीति निश्चित रूप से अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित कर सकती है। यदि अन्य प्रांत भी इस प्रकार के कठोर कदम उठाते हैं तो भारत में भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आ सकती है और सरकारी प्रणाली में विश्वास बढ़ सकता है।

सकारात्मक कदम

समग्रता में हरियाणा सरकार का यह कदम एक सकारात्मक दिशा में है, जो यह सुनिश्चित करता है कि जो लोग सरकारी सेवा को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं, उन्हें उन पर गंभीरता से विचार करना होगा। आशा की जाती है कि इस नीति का कार्यान्वयन सही ढंग से होगा और इससे भ्रष्टाचार के अंत में एक नई सुबह की शुरुआत होगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हरियाणा में अधिकारियों की कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप जनसंख्या को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकें।

इस संघर्ष में नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और भ्रष्टाचार के प्रति आवाज उठानी चाहिए। केवल तभी हम एक स्वस्थ और पारदर्शी प्रणाली की स्थापना कर सकेंगे। हरियाणा सरकार का यह कदम एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

 

 

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