हुमायूं कबीर, अजमल और ओवैसी… बंगाल से असम तक विधानसभा चुनाव में धूल चाट गए मुस्लिम महारथी

kabir owaisi and badruddin

नई दिल्ली, BNM News। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की बात करें तो बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा सरकार बनाने जा रही है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके-एआईडीएमके खिलाफ उलटफेर करते हुए थलापति विजय की पार्टी टीवीके सरकार बनाते हुए दिख रही है। जबकि केरल विधानसभा चुनाव नतीजे कांग्रेस को राहत देने वाले हैं।

केरलम में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ लेफ्ट गठबंधन एलडीएफ को सत्ता से हटाकर सरकार बनाने की ओर बढ़ रहा है। लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी बात है कि न तो मुस्लिम कार्ड चला और न ही मुस्लिम महारथी चुनाव में कुछ खास कर पाए। असम में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ, बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी, पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का इंडियन सेकुलर फ्रंट और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम कोई कमाल नहीं कर पाई।

हुमायूं कबीर को मुंह की खानी पड़ी

बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले साल अक्टूबर में नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाई थी। हुमायूं कबीर ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा। हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजीनगर (Rejinagar) और नोआदा (Noada) से चुनावी मैदान में हैं। लेकिन हुमायूं कबीर की पार्टी किसी भी सीट पर आगे नहीं है। हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद की नींव भी रखी थी, जिसको लेकर भी काफी बवाल मचा था। हालांकि बीजेपी को हराने के लिए मुस्लिम वोटों ने ज्यादातर ममता बनर्जी की ओर रुख किया।

पीरजादा का सेकुलर फ्रंट भी नाकाम

पीरजादा नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाला इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने भी बंगाल विधानसभा चुनावों में कुल 120 सीटों पर चुनाव लड़ा। आईएसएफ ने 33 सीटों पर लेफ्ट के साथ गठबंधन में लड़ रही थी। लेकिन वाम मोर्चा (Left Front) के साथ आईएसएफ को धूल चाटनी पड़ी। नौशाद सिद्दीकी खुद भांगड़ विधानसभा सीट से पीछे हैं। भांगड़ में टीएमसी के दिग्गज नेता शौकत मोल्ला आगे हैं। नौशाद सिद्दीकी बंगाल के मुस्लिमों में प्रभावशाली फुरफुरा शरीफ से ताल्लुक रखते हैं। ISF दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, हावड़ा, हुगली और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल में चुनाव लड़ रही थी।

बदरुद्दीन अजमल कभी थे किंगमेकर, आज जमीन पर

असम विधानसभा चुनाव में कभी किंगमेकर कहे जाने वाले बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF की बुरी हार हई। AIUDF इस बार 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। इस बार AIUDF का कांग्रेस से गठबंधन नहीं था। लेकिन एआईयूडीएफ सिर्फ 2 सीटों पर ही आगे है। अजमल खुद बिन्नाकांडी (Binnakandi) से आगे हैं। लेकिन वो 14 सीटों के घाटे में चल रही है। एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच 2021 के असम विधानसभा चुनाव में गठबंधन था और महाजोत का वो हिस्सा थे। कांग्रेस ने ध्रुवीकरण से बचने के लिए AIUDF से गठबंधन तोड़ लिया था। कांग्रेस को इस बार मुस्लिम वोट तो मिला लेकिन वो हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण को रोक पाने में नाकाम रही।

ओवैसी की एआईएमआइएम पार्टी भी नाकाम

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हुमायूं कबीर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया था। AIMIM ने विशेष रूप से 8 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन वो कहीं भी दूसरे नंबर पर भी नहीं है। ओवैसी बिहार जैसा कमाल बंगाल में नहीं दिखा पाए। AIMIM ने असम में एआईयूडीएफ का समर्थन भी किया था, लेकिन अजमल को कोई फायदा नहीं मिला। ओवैसी ने असम का दौरा किया और AIUDF के पक्ष में 8 रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने वोटरों से AIUDF के चुनाव चिन्ह ताला-चाबी पर वोट देने की अपील की।

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