स्वदेशी किट से 60 से 90 मिनट में होगी सर्विकल कैंसर की जांच, जानें इसकी खासियत

Cervical Cancer

नई दिल्ली, BNM News : सर्विकल कैंसर की जांच की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। तीन ऐसी स्वदेशी किट विकसित की गई है, जिससे सर्विकल कैंसर की स्क्रीनिंग आसान और सस्ती हो जाएगी। इस किट के माध्यम से एचपीवी जांच की रिपोर्ट 60 से 90 मिनट में मिल जाएगी। जानकारी के मुताबिक, एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) जांच की लिए विकसित तीन स्वदेशी किट का दिल्ली के एम्स सहित देश के तीन संस्थानों में 22 जनवरी से ट्रायल शुरू हुआ है। ट्रायल में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आइसीएमआर) के मुंबई स्थित एनआइआरआरसीएच (राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान) और नोएडा स्थित राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआइसीपीआर) भी शामिल हैं।

प्वाइंट आफ केयर जांच

एम्स के गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डा. नीरजा भाटला ने बताया कि यह प्वाइंट आफ केयर जांच है। उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष करीब सवा लाख महिलाएं सर्विकल कैंसर की चपेट में आती है। करीब 77 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है, जबकि स्क्रीनिंग के जरिये यह बीमारी विकसित होने से करीब दस वर्ष पहले शरीर की कोशिकाओं में होने वाले बदलाव की पहचान कर अब्लेशन थेरेपी से 40 सेकेंड में इलाज किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 35 से 45 वर्ष की उम्र की 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग सुनिश्चित होनी चाहिए। स्थिति यह है कि बड़े अस्पतालों में भी 24 प्रतिशत महिलाओं की ही स्क्रीनिंग हो पाती है।

ट्रायल 1200 महिलाओं पर होगा

देश में ज्यादातर महिलाओं को सर्विकल कैंसर की बीमारी एचपीवी वायरस के स्ट्रेन 16 और 18 के संक्रमण के कारण होती है। ट्रायल में शामिल दो किट 13 से 14 तरह के संक्रमण और एक अन्य किट सात तरह के स्ट्रेन के संक्रमण की पहचान करने में सक्षम है। ट्रायल 1200 महिलाओं पर होगा। तीन माह में उन महिलाओं की जांच पूरी हो जाएगी और करीब एक वर्ष में ट्रायल पूरा होगा। अभी कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम में वीआइए (विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड) शामिल है। यह जांच करने में दिक्कत होती है। हर तीन से पांच वर्ष पर यह जांच करानी होती है। यह एचपीवी जांच की तरह असरदार भी नहीं है।

स्वदेशी किट बहुत सस्ती होगी

विदेश में निर्मित एचपीवी जांच किट का शुल्क 1500-2000 रुपये है। इसके मुकाबले स्वदेशी किट बहुत सस्ती होगी। महिलाओं को 35 और 45 वर्ष की उम्र में दो बार ही स्क्रीनिंग करानी होगी। कोरोना की तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी आसानी से जांच हो सकेगी।

स्वदेशी टीके की सिंगल डोज का भी होगा ट्रायल

 

डा. नीरजा भाटला ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ओर से स्वीकृत सर्विकल कैंसर के टीके की एक डोज ही इस बीमारी से बचाव में असरदार है। 20 वर्ष से अधिक उम्र की युवतियां सिर्फ एक डोज का टीका ले सकती हैं। भारतीय टीके की अभी दो डोज स्वीकृत हैं। भारतीय टीके की सिंगल डोज का प्रभाव जानने के लिए ट्रायल शुरू होने वाला है। इसमें एम्स के अलावा आइसीएमआर का नेशनल वायरोलाजी इंस्टीट्यूट (एनवीआइ) शामिल होगा।

 

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