ऑस्‍ट्रेलिया में खराब प्रदर्शन पर रोहित शर्मा, गंभीर और अजित अगरकर से बीसीसीआइ ने पूछे सवाल, क्‍या होगा बड़ा बदलाव?

Rohit Virat

नई दिल्ली : Indian Cricket Team: हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन ने न केवल प्रशंसकों को निराश किया है बल्कि बीसीसीआइ के अधिकारियों को भी चिंतित कर दिया है। श्रीलंका से वनडे सीरीज में हार, न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर पहली बार 0-3 से टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप, और बार्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 1-3 से हार के साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल की दौड़ से बाहर होना यह सब एक गंभीर संकेत हैं कि भारतीय क्रिकेट को कुछ समग्रता से पुनर्विचार की आवश्यकता है। इस सब पर चर्चा करने के लिए शनिवार को मुंबई में एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

इस बैठक में बीसीसीआइ के अध्यक्ष रोजर बिन्नी, उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, मुख्य कोच गौतम गंभीर, कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य टीम के प्रदर्शन पर विचार-विमर्श करना और खिलाड़ियों के भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करना था।

योगदान का पुनर्मूल्यांकन किया जाए

 

बैठक में सबसे पहले चर्चा का केंद्र भारतीय टीम के नेतृत्व और विशेषकर कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली के प्रदर्शन पर रहा। हाल के प्रदर्शन में दोनों खिलाड़ियों की भूमिका पर गहराई से विचार किया गया। रोहित शर्मा ने कप्तान के रूप में कुछ असफलताएa अनुभव की हैं, जबकि विराट कोहली का बल्ला भी लंबे समय से खामोश है। बीसीसीआइ ने यह सुनिश्चित किया कि टीम के दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका और उनके योगदान का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।

इसके अलावा, दृष्टिगत रूप से टीम की फिटनेस पर भी गहन चर्चा हुई। बीसीसीआइ पहले से ही उन सभी वरिष्ठ खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में खेलने की आवश्यकता पर जोर दे चुका है जो अपनी संबंधित राज्य टीमों के लिए उपलब्ध हैं। बैठक में यह भी तय हुआ कि राष्ट्रीय स्तर का कोई खिलाड़ी तब तक घरेलू क्रिकेट नहीं खेलेगा जब तक कि उसे फिजियो की रिपोर्ट और मुख्य कोच व चयनकर्ता की अनुमति न मिले। अगर दोनों ही इन खिलाड़ियों को वर्कलोड के कारण खेलने की अनुमति नहीं देते हैं, तो उन्हें खेलने से छूट मिलेगी।

घरेलू क्रिकेट में अनुपस्थित रहने को लेकर भी चर्चा

 

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में रोहित और विराट के घरेलू क्रिकेट में अनुपस्थित रहने को लेकर भी चर्चा की गई थी। हालात की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर ध्यान दें और कॉम्पिटिटिव गेम्स में भाग लें।

गौतम गंभीर पर मुख्य कोच के रूप में सवाल

 

इस साल जब से गौतम गंभीर को मुख्य कोच बनाया गया है, तब से भारतीय टीम ने वनडे और टेस्ट प्रारूप में संघर्ष किया है। बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 2-0 की जीत के बाद सभी को उम्मीद थी कि भारतीय टीम तीसरी बार डब्ल्यूटीसी फाइनल में स्थान बना लेगी। लेकिन उसके बाद घर में न्यूजीलैंड से मिली 0-3 से हार ने सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया। यह घर में भारतीय टीम की 12 साल में पहली टेस्ट सीरीज की हार थी।

आस्ट्रेलिया में भारत ने पर्थ टेस्ट को छोड़कर बाकी सब जगह असफलता का सामना किया। ब्रिसबेन में न केवल टीम को बारिश ने बचाया, बल्कि अगर वहां भी वर्षा नहीं हुई होती, तो भारतीय टीम 1-4 से हार का सामना कर सकती थी। आस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज हारने के बाद, भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर और पूर्व आलराउंडर इरफान पठान ने भारतीय टीम की रणनीति और चयन पर सवाल उठाए। बीसीसीआइ के अधिकारियों ने गावस्कर के विचारों को गंभीरता से लिया और यह सुनिश्चित किया कि इस पर ध्यान दिया जाए।

कप्तान और कोच के रणनीतियों में बदलाव की आवश्यकता

 

बीसीसीआइ के वर्तमान नेतृत्व में समीक्षा बैठक ने यह संकेत दिया कि भारतीय क्रिकेट में कई मुद्दों का समाधान आवश्यक है। न केवल कप्तान और कोच के रणनीतियों में बदलाव की आवश्यकता है, बल्कि खिलाड़ियों के मानसिकता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी आवश्यक है। फिटनेस, फॉर्म और मानसिक संतुलन सभी महत्वपूर्ण हैं, जो टीम के प्रदर्शन में सुधार करेंगे।

आने वाले समय में, भारतीय कोचिंग स्टाफ और चयनकर्त्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि युवा खिलाड़ियों को अवसर मिले और उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। इसके अलावा, हर खिलाड़ी को अपनी जिम्मेवारी समझनी होगी और अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। बीसीसीआइ की एक मजबूत और दिशा-निर्देशों से भरी टीम की आवश्यकता है, ताकि भारतीय क्रिकेट को फिर से ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सके।

इस प्रकार बीसीसीआइ की समीक्षा बैठक एक प्रमुख कदम है, जो भारतीय क्रिकेट टीम को सही दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है और इसके परिणाम बड़े स्तर पर देखने को मिल सकते हैं। अब यह देखना होगा कि भविष्य में इन चर्चा का कितना गहरा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ता है।

 

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