भाखड़ा बांध विवाद : हरियाणा और पंजाब आमने-सामने, हरियाणा को और पानी नहीं देने पर अड़ा पंजाब

Punjab Haryana Water Issue

नरेन्‍द्र सहारण, चंडीगढ़ : Punjab Haryana Water Issue : भाखड़ा बांध से पानी के बंटवारे को लेकर हरियाणा और पंजाब के बीच विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के हस्तक्षेप के बाद भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने हरियाणा को 8,500 क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया, लेकिन पंजाब सरकार इस फैसले को मानने से इनकार कर रही है। पंजाब का कहना है कि वह हरियाणा को केवल 4,000 क्यूसेक पानी ही देगा, जो पहले से दिया जा रहा है। 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इस विवाद ने दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

पंजाब सरकार का सख्त रुख

 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को नंगल बांध के उस बिंदु का दौरा किया, जहां से पानी छोड़ा जाना था। उन्होंने अधिकारियों को हरियाणा के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ने से रोक दिया। पंजाब के जल संसाधन मंत्री हरजोत बैंस ने उस जगह को सील कर दिया, जहां से पानी का प्रवाह नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने क्षेत्र में भारी पुलिस बल भी तैनात कर दिया है। मुख्यमंत्री मान ने शुक्रवार, 2 मई को सर्वदलीय बैठक और 5 मई को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। विशेष सत्र में सरकार पानी के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश कर सकती है। राज्य भर में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए।

बीबीएमबी के निदेशक का तबादला

 

विवाद तब और बढ़ गया जब बीबीएमबी के निदेशक (जल विनियमन) इंजीनियर आकाशदीप सिंह को हटा दिया गया। उन्होंने बुधवार को हुई बैठक में यह कहते हुए हरियाणा के लिए पानी छोड़ने से इनकार कर दिया था कि इसके लिए पंजाब की अनुमति की आवश्यकता होगी। नियमों के अनुसार, जिस राज्य के कोटे से पानी छोड़ा जाना है, उसकी अनुमति आवश्यक है। आकाशदीप सिंह की जगह संजीव कुमार को निदेशक विनियमन बनाया गया है। संजीव कुमार हरियाणा के कोटे से बोर्ड में नियुक्त हैं। इससे पहले वे बांध सुरक्षा के निदेशक थे। पंजाब सरकार ने इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री मान ने सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया। इस बैठक में आप सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के बाद, आप के राज्य अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि बीबीएमबी में 60 प्रतिशत हिस्सा पंजाब का है। हरियाणा को पहले ही उसके हिस्से का पानी दिया जा चुका है।

पंजाब का तर्क: जल संकट

 

मुख्यमंत्री भगवंत मान नंगल बांध पहुंचे और पानी की निकासी की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पंजाब वर्तमान में गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और नदियों और बांधों में पानी की मात्रा चिंताजनक स्तर पर है। ऐसे में राज्य सरकार को मजबूरन यह निर्णय लेना पड़ा है कि धान की बुआई को देखते हुए हरियाणा को केवल आवश्यक मात्रा में ही पानी दिया जाए। मान ने कहा कि पंजाब को हरियाणा के लोगों की पूरी चिंता है, लेकिन यह पूरा विवाद भाजपा के राजनीतिक इशारे पर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 21 मई तक हरियाणा को अतिरिक्त पानी नहीं दिया जाएगा। इसके बाद, उन्हें अगली किस्त का पानी मिलेगा।

हरियाणा का पलटवार: राजनीतिक साजिश

 

पंचकूला में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान घटिया राजनीति पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में आज तक किसी ने किसी का पीने का पानी नहीं रोका, लेकिन पंजाब से हरियाणा को आने वाला पीने का पानी रोका जा रहा है। सैनी ने मान को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें हमारे गुरुओं से सीख लेनी चाहिए, जो किसी अजनबी का भी पानी पिलाकर स्वागत करते थे। उन्होंने कहा कि हमें यहां के संतों से प्रेरणा लेकर काम करना चाहिए और इस घटिया राजनीति को छोड़ देना चाहिए। सैनी ने कहा कि पंजाब हमारा बड़ा भाई है। अगर पंजाब प्यासा रहा, तो हम अपने हिस्से का पानी काटकर पंजाब को दे देंगे, यह हमारी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि वर्षा का पानी बर्बाद हो जाएगा और पाकिस्तान चला जाएगा, हम उन लोगों को पानी क्यों दें जिन्होंने हमारे लोगों की जान ली। सैनी ने कहा कि उनकी भगवंत मान से बात हुई है। उन्होंने मान से अरविंद केजरीवाल के प्रभाव में न आने और अपने विवेक से काम करने का आग्रह किया है।

कानूनी विकल्प: अनुच्छेद 257

 

यदि पंजाब नहीं मानता है, तो हरियाणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध कर सकता है। संविधान के अनुच्छेद 257 में दी गई शक्तियों का उपयोग करके, प्रधानमंत्री पंजाब सरकार को पानी छोड़ने में बाधा डालने से रोकने का आदेश दे सकते हैं, जिससे पंजाब को मानना ​​मजबूर हो जाएगा। अनुच्छेद 257 कहता है कि प्रत्येक राज्य द्वारा कार्यकारी शक्ति का उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए कि संघ की कार्यकारी शक्ति के प्रयोग में कोई बाधा या प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह अनुच्छेद केंद्र सरकार को राज्यों को निर्देश देने का अधिकार देता है। यदि केंद्र सरकार को लगता है कि किसी राज्य को कोई विशेष कार्य करना चाहिए जो राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक है, तो वह राज्य को ऐसा करने का निर्देश दे सकती है। राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करें।

विवाद का राजनीतिकरण

 

इस विवाद ने दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। हरियाणा में भाजपा सरकार है, जबकि पंजाब में आप की सरकार है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगा रही हैं। यह विवाद न केवल जल संसाधनों के बंटवारे का मुद्दा है, बल्कि दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति का भी प्रदर्शन है।

विवाद का संभावित समाधान

 

इस विवाद का समाधान केवल बातचीत और सहयोग से ही संभव है। दोनों राज्यों को मिलकर एक ऐसा समाधान निकालना होगा जो दोनों के हितों की रक्षा करे। केंद्र सरकार को भी इस मामले में मध्यस्थता करनी चाहिए और दोनों राज्यों को एक समझौते पर पहुंचने में मदद करनी चाहिए। जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाना भी आवश्यक है।

संवेदनशील मुद्दा

 

भाखड़ा बांध जल विवाद हरियाणा और पंजाब के बीच एक संवेदनशील मुद्दा है। इसका समाधान केवल आपसी सहमति और सहयोग से ही संभव है। दोनों राज्यों को राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर जल संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे के लिए काम करना चाहिए। केंद्र सरकार को भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और दोनों राज्यों को एक स्थायी समाधान खोजने में मदद करनी चाहिए।

 

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