Chinnaswamy Stadium: बेंगलुरु में RCB की जीत का जश्न मातम में तब्दील, चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ में 11 प्रशंसकों की मौत

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बेंगलुरु : अट्ठारह वर्षों का लंबा इंतजार, अनगिनत उम्मीदें, और ‘ई साला कप नमदे’ (इस साल कप हमारा है) का एक पीढ़ी से चला आ रहा नारा आखिरकार मंगलवार की रात को हकीकत में बदल गया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पंजाब किंग्स को एक रोमांचक फाइनल मुकाबले में छह रनों से हराकर अपनी पहली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ट्रॉफी जीती थी। यह जीत सिर्फ एक क्रिकेट मैच की जीत नहीं थी, यह शहर के डीएनए में बसे एक जुनून, एक अटूट निष्ठा और धैर्य का प्रमाण थी। लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए बुधवार को जो उत्साह और उमंग चिन्नास्वामी स्टेडियम की ओर उमड़ा, वह कुछ ही घंटों में एक भयावह त्रासदी में बदल गया। स्टेडियम के बाहर प्रशंसकों की बेकाबू भीड़ में मची भगदड़ ने 11 जिंदगियों को लील लिया और 33 से अधिक लोगों को घायल कर दिया, जिससे जीत की खुशी गहरे शोक और सवालों के बीच दब गई।

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ऐतिहासिक जीत और जश्न की तैयारी

 

आरसीबी का आईपीएल सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कई बार प्लेऑफ तक पहुंचने, कुछ मौकों पर फाइनल में जगह बनाने के बावजूद, ट्रॉफी उनसे दूर ही रही थी। विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी की मौजूदगी और दुनिया भर में फैले प्रशंसकों के अपार समर्थन के बावजूद, टीम को अक्सर ‘अंडरअचीवर्स’ का तमगा झेलना पड़ा। लेकिन इस साल, एक नई ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। रजत पाटीदार, जो इस सीजन में टीम के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरे, के नेतृत्व (जैसा कि टीम के आगमन पर स्वागत के संदर्भ में उल्लेख किया गया, हालांकि कप्तानी फाफ डु प्लेसिस ने की थी, संभवतः पाटीदार किसी विशेष दल का नेतृत्व कर रहे थे) और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास ने आखिरकार आरसीबी के प्रशंसकों का सपना पूरा कर दिया।

बेंगलुरु शहर में जश्न

 

मंगलवार रात जैसे ही आरसीबी ने जीत दर्ज की, बेंगलुरु शहर में जश्न शुरू हो गया। आधी रात को सड़कों पर प्रशंसक उतर आए, पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटी गईं। असली और बड़े जश्न की तैयारी बुधवार के लिए थी। कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (केसीए) ने टीम के सम्मान में और प्रशंसकों को अपनी प्रिय टीम की एक झलक पाने का अवसर देने के लिए चिन्नास्वामी स्टेडियम में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की थी।

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अनियंत्रित उत्साह और भगदड़ का भयावह मंजर

 

बुधवार दोपहर को जब विजयी टीम केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी, तो उनका स्वागत किसी नायक की तरह हुआ। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने टीम का अभिनंदन किया। हवाई अड्डे से स्टेडियम तक के मार्ग पर हजारों प्रशंसक अपनी टीम, खासकर विराट कोहली और अन्य खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए घंटों से कतारबद्ध थे। माहौल में उत्साह और जुनून चरम पर था।

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चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भारी भीड़

 

चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर स्थिति और भी विकट थी। स्टेडियम की क्षमता लगभग 35,000 दर्शकों की है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों और सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दो से तीन लाख लोग स्टेडियम और उसके आसपास जमा हो गए थे। हर कोई अपनी टीम के नायकों को देखना चाहता था, उनके साथ इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनना चाहता था।

प्रशंसकों की बेकाबू भीड़

 

कार्यक्रम शुरू होने से कुछ समय पहले, स्टेडियम के भीतर प्रवेश पाने की कोशिश में प्रशंसकों की भीड़ बेकाबू होने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धक्का-मुक्की और आगे बढ़ने की होड़ ने जल्द ही भगदड़ का रूप ले लिया। प्रवेश द्वारों पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया। पुलिस, जो पहले से ही भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही थी, स्थिति को संभालने में असमर्थ दिखी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कर्नाटक विधानसभा भवन के बाहर मौजूद भीड़ का एरियल फोटो।

चीख-पुकार और अफरातफरी

 

देखते ही देखते, खुशी और उत्साह का माहौल चीख-पुकार और अफरातफरी में बदल गया। कई लोग नीचे गिर गए और अनियंत्रित भीड़ के पैरों तले कुचले गए। हृदय विदारक दृश्यों में लोग घायलों और बेहोश हुए लोगों को उठाकर एम्बुलेंस की ओर भागते दिखे। कुछ जागरूक नागरिकों को बेहोश पड़े लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देते हुए भी देखा गया, जो उस भयावह स्थिति की गंभीरता को दर्शाता था। हैरानी की बात यह है कि स्टेडियम के भीतर जीत का जश्न तब भी जारी रहा, जबकि बाहर यह त्रासदी घट रही थी।

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सरकारी प्रतिक्रिया और मुआवजे की घोषणा

 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक ऐसी त्रासदी बताया जिसे नहीं होना चाहिए था। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की और कहा कि सरकार सभी घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस घटना का बचाव नहीं करना चाहती और न ही इस पर राजनीति करेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी को भी इतनी बड़ी और अनियंत्रित भीड़ की उम्मीद नहीं थी, खासकर जब स्टेडियम की क्षमता सीमित थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।

उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भीड़ अनियंत्रित हो गई थी और पुलिस के लिए इसे संभालना मुश्किल हो गया था, जिसके कारण टीम के विजय जुलूस को भी रोकना पड़ा। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और न घबराने की अपील की और पुलिस आयुक्त व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए समन्वय स्थापित किया।

आयोजकों पर उठते सवाल और कुप्रबंधन के आरोप

 

इस दुखद घटना के बाद, कार्यक्रम के आयोजकों, विशेष रूप से कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन, पर कुप्रबंधन और लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब आरसीबी की पहली जीत के बाद भारी भीड़ जुटने की प्रबल संभावना थी, तो सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या स्टेडियम की क्षमता और अपेक्षित भीड़ के बीच भारी अंतर को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक व्यवस्था या बेहतर योजना नहीं बनाई जा सकती थी?

बेंगलुरु पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर कहा था कि चिन्नास्वामी स्टेडियम में केवल वैध टिकट और पास धारकों को ही प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही, स्टेडियम के पास सीमित पार्किंग सुविधा के कारण लोगों को सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी गई थी। लेकिन यह एडवाइजरी लाखों की संख्या में उमड़े जुनूनी प्रशंसकों को नियंत्रित करने के लिए अपर्याप्त साबित हुई।

खुली छत वाली बस परेड का रद्द होना

 

टीम के स्वागत के लिए एक खुली छत वाली बस परेड की भी योजना थी, जो विधान सौध से स्टेडियम तक आनी थी। शुरुआत में, बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने यातायात संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी थी। हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इसके लिए अनुमति दे दी थी। लेकिन, हवाई अड्डे से लेकर स्टेडियम के बाहर तक जमा हुई अनियंत्रित और विशाल भीड़ को देखते हुए, सुरक्षा कारणों से इस बहुप्रतीक्षित परेड को अंततः रद्द करना पड़ा। यह निर्णय शायद और बड़ी दुर्घटना को टालने के लिए आवश्यक था, लेकिन इसने प्रशंसकों की निराशा को और बढ़ा दिया होगा।

राष्ट्रीय शोक और प्रतिक्रियाएं

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “बेंगलुरु में हुई दुर्घटना बहुत हृदय विदारक है। इस दुखद घड़ी में मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि जो लोग घायल हुए हैं, वे शीघ्र स्वस्थ हों।”

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी इस घटना पर दुख जताया और कहा कि ऐसे हादसे किसी भी राज्य में हो सकते हैं और इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए कहा, “अगर यह भाजपा शासित राज्य में होता, तो हमें उसे दोष नहीं देना चाहिए।”

घायलों का उपचार और बढ़ती चिंता

 

भगदड़ में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों का इलाज वैदेही अस्पताल और बोवरिंग अस्पताल सहित शहर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। कई घायलों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों के बाहर भी परिजनों और शुभचिंतकों की भीड़ जमा है, जो अपने प्रियजनों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

एक सबक और भविष्य की चुनौतियां

 

बेंगलुरु की यह त्रासदी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यह घटना भारत में बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों, खासकर क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल से जुड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है। जब भावनाएं चरम पर होती हैं और प्रशंसकों का जुनून असीम होता है, तो सुरक्षा व्यवस्था और योजना अत्यधिक महत्व रखती है।

मजिस्ट्रेट जांच से उम्मीद है कि घटना के कारणों, किसी भी संभावित लापरवाही और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के उपायों पर प्रकाश डाला जाएगा। यह आवश्यक है कि आयोजक, स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ऐसे कार्यक्रमों के लिए एक व्यापक और मजबूत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करें, जिसमें जोखिम मूल्यांकन, भीड़ नियंत्रण तकनीक, आपातकालीन निकास योजनाएं और चिकित्सा सहायता की त्वरित उपलब्धता शामिल हो।

खुशी पर मातम का साया

 

आरसीबी की ऐतिहासिक आईपीएल जीत, जो बेंगलुरु और दुनिया भर में उसके लाखों प्रशंसकों के लिए अपार खुशी और गर्व का क्षण लेकर आई थी, अब इस दुखद भगदड़ की छाया में दब गई है। एक सपना जो अट्ठारह साल बाद पूरा हुआ, उसकी खुशी पूरी तरह मनाई भी नहीं जा सकी। यह त्रासदी एक कठोर अनुस्मारक है कि उत्साह और जश्न की कोई भी अभिव्यक्ति मानवीय जीवन की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। जैसे-जैसे शहर इस झटके से उबरने की कोशिश कर रहा है, सभी की संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। उम्मीद है कि इस घटना से सबक लिया जाएगा और भविष्य में प्रशंसकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि जीत का जश्न कभी मातम में न बदले।

भगदड़ की प्रमुख घटनाएं

 

-3 मई, 2025: गोवा के शिरगाओ गांव में श्री लैराई देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव के दौरान मची भगदड़ में छह लोगों की मौत हो गई और करीब 100 लोग घायल हो गए।

-15 फरवरी, 2025: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। वे महाकुंभ के लिए प्रयागराज जाने वाली ट्रेन में सवार होने का इंतजार कर रहे थे।
-29 जनवरी, 2025: महाकुंभ के संगम क्षेत्र में मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई और 60 लोग घायल हो गए।
-8 जनवरी, 2025: तिरुमला हिल्स में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शनम की खातिर टिकट लेने के लिए मची भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
-4 दिसंबर, 2024: हैदराबाद के संध्या थिएटर में अल्लू अर्जुन की ब्लाकबस्टर ‘पुष्पा 2’ की स्क्रीनिंग के दौरान मची भगदड़ में एक महिला की मौत हो गई और एक लड़का घायल हो गया। इस मामले में अल्लू अर्जुन को एक रात जेल में गुजारनी पड़ी थी।
-2 जुलाई, 2024: उत्तर प्रदेश के हाथरस में भोले बाबा उर्फ नारायण साकर हरि द्वारा आयोजित ‘सत्संग’ में भगदड़ से महिलाओं और बच्चों सहित 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

 

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