पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पूर्व सैनिक की तलाकशुदा बेटी दोहरी पारिवारिक पेंशन की हकदार

Punjab Haryana Highcourt

नरेन्द्र सहारण, चंडीगढ़। Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पूर्व सैनिक की तलाकशुदा बेटी उस दोहरी पेंशन की हकदार है, जो उसके पिता और माता को हरियाणा राज्य में सैन्य और सिविल नौकरी में दी गई सेवाओं के मद्देनजर मिल रही थी। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को याचिकाकर्ता को बकाया राशि के साथ दोहरी पारिवारिक पेंशन का लाभ जारी करने का निर्देश दिया है। हरियाणा सरकार ने एक तलाकशुदा महिला को उसके माता-पिता की मृत्यु के बाद पेंशन देने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, उसे सेना से पारिवारिक पेंशन मिल रही थी।

याचिकाकर्ता दोहरी पारिवारिक पेंशन के लाभ की हकदार नहीं: हरियाणा सरकार

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा उठाई गई एकमात्र आपत्ति यह है कि याचिकाकर्ता दोहरी पारिवारिक पेंशन के लाभ की हकदार नहीं है, जो सात फरवरी, 2014 के निर्देशों की व्याख्या को पूरी तरह से मनमाना और अवैध बताता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य द्वारा पारित 16 जनवरी 2020 के आदेश को रद किया जाता है। याचिकाकर्ता को उस दोहरी पारिवारिक पेंशन के लाभ के लिए हकदार माना जाता है, जो उसके पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां को दी जा रही थी।

नीलम कुमारी की याचिका पर हुई सुनवाई

हरियाणा के अंबाला जिले की निवासी नीलम कुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी ने यह आदेश पारित किए हैं। उन्होंने 16 जनवरी, 2020 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दोहरी पारिवारिक पेंशन का लाभ देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के पिता मंगत राम भारतीय सेना में कार्यरत थे और सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन मिल रही थी। इसके बाद वे हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में शामिल हो गए, जहां से 27 साल की सेवा के बाद फरवरी 1985 में वे सेवानिवृत्त हुए।

अगस्त 1992 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता की मां शांति देवी को पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया गया। प्रारंभ में सेवा को नियंत्रित करने वाले नियमों के अनुसार हरियाणा राज्य में दोहरी पेंशन का लाभ उपलब्ध नहीं था। लेकिन सात फरवरी 2014 की अधिसूचना के अनुसार पंजाब सिविल सेवा नियम खंड-II में संशोधन किया गया ताकि यह शामिल किया जा सके कि इस योजना द्वारा शासित ऐसे सरकारी कर्मचारियों की विधवाओं को दोहरी पारिवारिक पेंशन यानी एक सिविल पक्ष से और दूसरी सैन्य पक्ष से प्राप्त करने की अनुमति दी जाएगी।

हरियाणा सरकार ने दूसरी पेंशन को अस्वीकार कर दिया

इस आधार पर याचिकाकर्ता की मां को जुलाई 2015 में दोहरी पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया गया था। उसकी मां की मृत्यु दिसंबर 2017 में हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ता तलाकशुदा बेटी होने के नाते और अपनी मां पर निर्भर होने के कारण छह नवंबर 2019 को सेना के अधिकारियों द्वारा पेंशन प्रदान की गई। हालांकि, हरियाणा सरकार ने राज्य के परिवहन विभाग में उसके पिता की सेवा के लिए उसके बाद के माता-पिता द्वारा प्राप्त दूसरी पेंशन को अस्वीकार कर दिया। राज्य सरकार ने दलील दी कि सात फरवरी, 2014 की अधिसूचना के अनुसार केवल विधवाओं/विधुरों को ही दोहरी पारिवारिक पेंशन का लाभ देने के लिए पात्र बनाया गया है, मृतक कर्मचारी के आश्रितों को नहीं, इसलिए याचिकाकर्ता को उसकी मां की मृत्यु के बाद दोहरी पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। उसकी याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस सेठी ने कहा कि 1964 की योजना के अनुसार पारिवारिक पेंशन कानूनी उत्तराधिकारियों को स्वीकार्य है, जिसमें प्रविधान है कि विधवाओं/विधुरों को पारिवारिक पेंशन की पात्रता है, लेकिन यदि कोई आश्रित बच्चा या तलाकशुदा बेटी है, तो वे भी पारिवारिक पेंशन के लाभ के लिए पात्र हैं।

 

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