Kaithal News : कलायत में डीसी ने किया ड्रेनों का निरीक्षण, बाढ़ से बचाव की तैयारी

DC Preeti In Kalayat

कलायत में ड्रेन का निरीक्षण करते हुए डीसी प्रीति।

नरेंद्र सहारण, कैथल : Kaithal News : हरियाणा के कैथल जिले में मानसून की पहली बौछारें आने से पहले ही जिला प्रशासन ने जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिले के सभी मुख्य और दुर्गम इलाकों में जल निकासी की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने ड्रेनों की सफाई को प्राथमिकता दी है। इस दिशा में जिला उपायुक्त प्रीति ने शनिवार को खास तौर पर कलायत क्षेत्र का दौरा किया और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते सही ढंग से ड्रेनेज सिस्टम की सफाई नहीं की गई, तो मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जो जनजीवन और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

ड्रेनों की सफाई का महत्व और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी

 

वर्षों से जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से कई इलाकों में जल जमाव की समस्या आम रही है। जलभराव न केवल सड़कों पर आवागमन बाधित करता है बल्कि जलजनित रोगों का खतरा भी बढ़ता है। खासतौर पर मानसून के मौसम में जलजमाव की स्थिति गंभीर बन जाती है, जिससे जीवन और संपदा दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।

इसलिए जिला उपायुक्त प्रीति ने इस वर्ष खास अभियान चलाने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि मानसून से पहले ही नाली-नालियों की सफाई, गाद निकालने, पेड़ों की टहनियों की छंटाई और ड्रेनों का निरीक्षण जरूरी है ताकि बारिश के दौरान जल निकासी सुचारू रूप से हो सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो जलभराव से न केवल यातायात प्रभावित होगा, बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा। इसीलिए, जिले के सभी विभागों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ड्रेनों की सफाई सुनिश्चित करें।

ड्रेनों की सफाई के लिए दिशा-निर्देश और कार्ययोजना

 निरीक्षण और मापन कार्य

प्रशासन ने सबसे पहले ड्रेनों की स्थिति का जायजा लेने के लिए व्यापक निरीक्षण की योजना बनाई है। शनिवार को जिला उपायुक्त प्रीति ने खुद कलायत शहर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूंडरी-2 से खरक तक की ड्रेन का निरीक्षण किया। उन्होंने ड्रेन की चौड़ाई और गहराई का मापन किया ताकि सफाई के लिए आवश्यक कार्य का सही आकलन किया जा सके।

सफाई का शेड्यूल और टेंडर प्रक्रिया

डीसी ने स्पष्ट किया कि सभी विभागों की मदद से एक व्यवस्थित शेड्यूल बनाया जाएगा। इसमें मनरेगा मजदूरों की भागीदारी भी शामिल होगी। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में मानव बल से सफाई संभव नहीं है, वहां मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गाद और कचरे का निष्कासन

ड्रेनों में जमा गाद, मिट्टी, पेड़ की टहनियों और जलकुंभी को हटाने का कार्य प्राथमिकता दी गई है। निरीक्षण के दौरान, उन्होंने कहा कि जहां भी गाद की अधिकता है, उसे तुरंत निकालें। साथ ही, पुलों के नीचे से मिट्टी हटाने और कवर की गई ड्रेनों की भी सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ड्रेनों का रियल टाइम मॉनिटरिंग

सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे नियमित रूप से ड्रेनों की स्थिति की निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि सफाई कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा हो और कार्य में किसी भी तरह की कमी न हो। यदि कोई विभाग तय समय में कार्य पूरा नहीं करता है, तो इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

विभागों का समन्वय और कार्यान्वयन

ड्रेनों की सफाई में सिंचाई विभाग और वन विभाग का भी अहम योगदान है। वन विभाग को पेड़ों की टहनियों की छंटाई के लिए कहा गया है ताकि जलरोकावट न हो। वहीं, सिंचाई विभाग का उद्देश्य है कि ड्रेनों की सफाई के साथ-साथ जल प्रवाह को सही दिशा में सुनिश्चित किया जाए।

मनरेगा का प्रयोग और मजदूरों की तैनाती

मनरेगा के मजदूरों को सफाई कार्य में लगाया जाएगा। इसके लिए, एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को आवश्यकताओं की जानकारी दी गई है। इस कार्य में किसी भी तरह की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

मशीनों का इस्तेमाल और जोखिम प्रबंधन

जहां मानव श्रम से सफाई संभव नहीं है या जोखिम भरा है, वहां मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। इससे कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और समय पर कार्य पूरा किया जा सकेगा। मशीनों के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

ड्रेनों की सफाई से जलभराव की समस्या से निजात

जल जमाव रोकने का उद्देश्य

ड्रेनों की सफाई का मुख्य उद्देश्य है कि मानसून में पानी का बहाव बिना रुकावट के हो सके। इससे जल जमाव की स्थिति नहीं बनेगी और सड़कों, गलियों, और खेतों में पानी का संचय नहीं होगा। जल निकासी की सही व्यवस्था से बीमारियों का खतरा भी कम हो जाएगा, जैसे मलेरिया, डेंगू आदि।

गाद और जलकुंभी की सफाई

ड्रेनों में जमा गाद और जलकुंभी जल प्रवाह के मार्ग में बाधा बनते हैं। इन्हें समय पर निकालना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर, ड्रेनों में पेड़-पौधों की टहनियों की छंटाई भी की जाएगी, ताकि बहाव में कोई बाधा न आए।

मानसून की तैयारी: सावधानी और सतर्कता

डीसी प्रीति ने कहा कि मानसून के दौरान जल भराव की स्थिति से निपटने के लिए समय रहते सभी आवश्यक कदम उठाना जरूरी है। यदि सफाई में देरी हुई, तो जलभराव और बाढ़ जैसी आपात स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सड़क और मोहल्लों की निगरानी

सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करें। किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से भी आग्रह किया गया है कि वे सफाई में कमी या जलभराव की सूचना तुरंत जिला कार्यालय को दें।

अंतिम लक्ष्य और अपेक्षाएं

जिला उपायुक्त का लक्ष्य है कि 16 जून तक सभी ड्रेनों की सफाई पूरी हो जाए। इस कार्य में तेजी लाने के लिए विभागों को समय-सीमा का कठोर पालन करने का निर्देश दिया गया है।

सभी विभागों और अधिकारियों का संयुक्त प्रयास ही जलभराव से निपटने का समाधान है। यदि यह अभियान सफल रहता है, तो न केवल जल जमाव की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिहाज से भी क्षेत्र बेहतर स्थिति में रहेगा।

जल निकासी व्यवस्था को करें मजबूत

कैथल जिले में मानसून से पहले ही जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास शुरू हो चुका है। जिला उपायुक्त प्रीति के नेतृत्व में अधिकारियों ने ड्रेनों की सफाई का कार्य तेजी से शुरू कर दिया है, ताकि बारिश के समय जलभराव न हो। यह अभियान न केवल जल निकासी सुधारने का प्रयास है, बल्कि यह समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी का भी परिचायक है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समय पर कार्यवाही और तकनीकी सहयोग से जल व्यवस्था को मजबूत बनाना संभव है। आशा है कि इस अभियान के सफल होने से जिले में जलभराव और बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी और जनता को बेहतर जीवनशैली का अनुभव होगा।

संबंधित सुझाव

– जल निकासी की व्यवस्था के लिए स्थायी समाधान अपनाना चाहिए।
– नियमित निगरानी और निरीक्षण को आदत बनाना चाहिए।
– स्थानीय समुदाय को जागरूक कर सफाई में भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
– आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर ड्रेनों का रख-रखाव बेहतर किया जाना चाहिए।
संपूर्ण प्रयास से ही हम जलभराव मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित कैथल का सपना साकार कर सकते हैं।

 

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