क्या मोबाइल फोन के रेडिएशन से होता है कैंसर का खतरा?, जानिए हर सवाल का जवाब

नरेन्द्र सहारण। अगर ज्यादातर वक्त आप अपने मोबाइल में डूबे रहते हैं, तो इससे समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इसके रेडिएशन से कैंसर होने के डर का कोई आधार नहीं। अगर आप सारा दिन अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं, तो इससे आपको नींद संबंधी विकारों का सामना करना पड़ सकता है, कार्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जोड़ों में दर्द रह सकता है और आपके रिश्ते भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन अगर आप मोबाइल फोन से निकलने वाले विकिरण (रेडिएशन) से डरे हुए हैं, तो विशेषज्ञों का कहना है कि इस डर से आपको फोन छोड़ने की कतई जरूरत नहीं है।

विकिरण का कैंसर या किसी भी दूसरी बीमारी से कोई संबंध नहीं

 

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डीन गेल वोलोस्चक के अनुसार सेलफोन का विकिरण खतरनाक नहीं होता। बर्मिंघम में अलबामा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एमिला कैफ्रे कहती हैं कि स्मार्टफोन विकिरण उत्सर्जित करते हैं, क्योंकि ये आवाज, टेक्स्ट, फोटो और ई-मेल को नजदीकी मोबाइल टावर तक पहुंचाने के लिए अदृश्य ऊर्जा तरंगों का उपयोग करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस संबंध में करीब तीन दशक के वैज्ञानिक अनुसंधान बताते हैं कि इस विकिरण का कैंसर या किसी भी दूसरी बीमारी से कोई संबंध नहीं है।

स्मार्टफोन विकिरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं

 

न्यूयॉर्क में कार्नेल मेडिकल सेंटर में ब्रेन ट्यूमर केंद्र के निदेशक डॉ हॉवर्ड फाइन के अनुसार विकिरण कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ ही हानिकारक होते हैं। डॉ फाइन कहते हैं कि परमाणु बम या काफी हद तक एक्सरे मशीनें आयनीकृत विकिरण का उत्सर्जन करती हैं, जो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं और कैंसर का कारण भी बन सकती हैं। लेकिन, डॉ कैफ्री के अनुसार स्मार्टफोन से उत्सर्जित होने वाला विकिरण गैर-आयनीकृत श्रेणी का होता है, जो उतना शक्तिशाली नहीं होता कि नुकसान पहुंचा सके। आयनीकृत विकिरण ज्यादा खतरनाक होते हैं, जो हमारे डीएनए को बनाने वाले परमाणुओं से इलेक्ट्रॉनों को अलग कर देते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका पैदा होती है। इसका प्रमाण कोई नहीं है कि स्मार्टफोन विकिरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

 

कैंसर को मोबाइल विकिरण से जोड़ने का कोई अर्थ नहीं

 

प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार आज ज्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कैंसर का कारण मोबाइल फोन है। धूम्रपान, प्रदूषण, खराब जीवनशैली इत्यादि कैंसर का कारण तो कुछ भी हो सकता है, इसे मोबाइल विकिरण से जोड़ने का कोई अर्थ नहीं। आज जो मोबाइल फोन आ रहे हैं, वे 2000 की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं। 5जी विकिरण दरअसल, 4जी से ज्यादा खतरनाक नहीं है, यह सिर्फ ज्यादा डाटा ट्रांसफर की अनुमति देता है। डॉ कैफ्री के अनुसार यह विकिरण शरीर के तापमान को एक डिग्री तक बढ़ा दता है, लेकिन डॉ वालोस्चेक के अनुसार बुखार या किसी अन्य स्वास्थ्य जोखिम को पैदा करने के लिए विकिरण को हमारे शरीर को एक डिग्री गर्म करने की जरूरत होगी, जो एक सेलफोन कभी नहीं कर सकता।

 

 

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