यूपी में नौकरी चाहने वाले रहें तैयार, इस साल डेढ़ लाख भर्तियां करेगी योगी सरकार

yogi adityanath

लखनऊ, BNM News। योगी सरकार चालू वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां देगी। लोकभवन में रविवार को 357 कनिष्ठ औषधि विश्लेषकों और 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र बांटते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह जानकारी दी।

इस दौरान उन्होंने 2017 से पहले हुई भर्तियों में बरती गई अनियमितताओं के लिए सपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। योगी बोले, भर्तियों में बेईमानी और भ्रष्टाचार ने राज्य को बीमारू बना दिया था।योगी आदित्यनाथ ने कहा, पिछले नौ वर्षों में नौ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरी दी गई। यह किसी भी राज्य में सर्वाधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सकुशल व पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का रिकॉर्ड है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया संपन्न होनी है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियां करेगा। शिक्षा सेवा चयन आयोग हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा। यूपी लोक सेवा आयोग को लगभग 15 हजार भर्तियां करनी हैं।

एसआई और होमगार्ड के 45 हजार पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा हो चुकी है। इसके अलावा 45 हजार की और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सेंध न लगे इसके लिए सख्त कानून भी बनाया गया है। सेंधमारी करने वालों को आजीवन कारावास की सजा और उसकी पूरी संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ लाख भर्तियों में से केवल पुलिस विभाग में 2,20,000 से अधिक भर्तियां कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना। दंगामुक्त और गुंडामुक्त प्रदेश हुआ, जिससे अच्छे निवेश आए। वर्ष 2017 से पहले भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एक ओर बैठते थे और चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए निकल पड़ती थी। बेईमान राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना है, तो इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, आयुष मंत्री दया शंकर मिश्रा दयालु, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह आदि उपस्थित रहे।

फर्जी डिग्री वाले लोग करते थे चयन प्रक्रिया का नेतृत्व

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भर्तियों की प्रक्रिया को लेकर सपा सरकार पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लगभग हर नियुक्ति प्रक्रिया पर कोर्ट का स्टे होता था। न्यायालय कड़ी टिप्पणियां करता था। अपात्र व्यक्ति आयोग का चेयरमैन बन जाता था। फर्जी डिग्री वाले चयन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे थे। पैसे के लेनदेन के कारण भर्तियां प्रभावित होती थीं और योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा पाकर सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। इसके लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो न केवल उस युवा के सपने टूटते हैं, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार से जुड़े अन्य लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो जाती हैं। किसी युवा के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ धोखा है।

औषधि जांच के लिए हर मंडल पर एक लैब मौजूद

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज देश का सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, हाइवे आदि मौजूद हैं। अब वे विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले लोग जानते तक नहीं थे। हर जिले में मेडिकल कॉले हैं। दो एम्स हैं। 2017 से पहले सब भगवान भरोसे था। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के पास दवा की क्वालिटी व खाद्य पदार्थों में मिलावट जांचने के उपकरण व प्रयोगशाला नहीं थीं। अब मंडल स्तर पर ए-ग्रेड की लैब हैं।

पहले पांच प्रयोगशालाओं में 12,000 नमूने हर साल लिए जाते थे। अब 55,000 नमूने लिए जाते हैं। 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) की भर्ती होने से इनकी संख्या 44 से बढ़ कर 401 हो गई है। कनिष्ठ विश्लेषकों (खाद्य) की संख्या अभी केवल 58 है। हमने 417 पदों के लिए अधियाचन भेजा है। वर्तमान में 36 हजार खाद्य नमूने हर साल लिए जाते हैं, जो भर्ती होने के बाद 1,08,000 से ज्यादा हो जाएंगे।

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